ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में चल रही महत्वपूर्ण वार्ता को एक दिन बढ़ा दिया गया है. 15 घंटे से ज्यादा चली मैराथन चर्चा के बाद भी दोनों पक्ष मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रखने को तैयार हैं. ईरानी राज्य मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, तकनीकी टीमों ने दोनों देशों के बीच समझ बनी हुई बातों को लिखित रूप में दर्ज करने के लिए ड्राफ्ट टेक्स्ट का आदान-प्रदान शुरू कर दिया है. ईरान सरकार ने X पर जारी बयान में साफ कहा, ‘पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका की बातचीत 14 घंटे बाद समाप्त हुई. दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें अब विशेषज्ञ टेक्स्ट का आदान-प्रदान कर रही हैं. कुछ बचे हुए मतभेदों के बावजूद वार्ता जारी रहेगी.’ बयान में आगे लिखा गया, “पाकिस्तान के प्रस्ताव पर और ईरान तथा अमेरिका की वार्ता टीमों की सहमति से, पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली बातचीत रविवार को ब्रेक के बाद एक और दौर के लिए जारी रहेगी.”
Breaking | At Pakistan’s proposal and with the agreement of the negotiating teams of #Iran and the U.S., talks mediated by Pakistan will continue for another round after a pause on Sunday.#IslamabadTalks https://t.co/iWjWDjdjZb
---विज्ञापन---— Government of the Islamic Republic of Iran (@Iran_GOV) April 11, 2026
रातभर चली बैठकों का दौर
वार्ता शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजे इस्लामाबाद के सेरेना होटल में शुरू हुई. ईरानी अधिकारियों ने सबसे पहले पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात की, उसके बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधी बातचीत शुरू की. यह चर्चा रातभर चली और रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 3:40 बजे समाप्त हुई. इतने लंबे समय तक चली बैठक से वार्ता की गंभीरता और जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इससे पहले शनिवार देर रात अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की पहली दौर की बातचीत समाप्त हुई. दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने दिनभर की चर्चा में बनी समझ को लिखित रूप में दर्ज करने के लिए टेक्स्ट का आदान-प्रदान किया. ईरानी राज्य मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, यह कदम दोनों पक्षों के बीच पहुंची समझ को औपचारिक रूप देने का प्रयास है.
क्या है बातचीत का मकसद?
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि वार्ता देर रात तक चली, जिससे बातचीत की तात्कालिकता और संवेदनशीलता का पता चलता है. रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों पक्षों के प्रमुख प्रतिनिधि इस्लामाबाद में मौजूद थे, जो इस वार्ता के उच्चस्तरीय स्वरूप को दर्शाता है. यह विकास पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच संरचित समझ बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाई है.










