फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर बिना नाम लिए कड़ा प्रहार करते हुए मैक्रों ने कहा कि दुनिया आज एक नियम-रहित विश्व की ओर बढ़ रही है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कुचले जाने और सिर्फ ताकतवर के कानून के हावी होने पर गहरी चिंता जताई. आसमानी रंग के सनग्लासेज पहनकर मंच पर पहुंचे मैक्रों ने कहा कि साल 2024 में 60 से ज्यादा युद्ध होना एक रिकॉर्ड है और अब टकराव को सामान्य मान लिया गया है. उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ बढ़ती तानाशाही और साइबर से लेकर व्यापार तक फैली हिंसा को वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया.
टैरिफ की धमकियों पर पलटवार
ट्रंप की ओर से 200 फीसदी टैरिफ की धमकी झेल चुके मैक्रों ने खुलकर अमेरिका की व्यापारिक दादागीरी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल अब निर्यात हितों को चोट पहुंचाने और यूरोप को अपने अधीन करने के लिए किया जा रहा है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है. मैक्रों के अनुसार नए-नए टैरिफ लगाकर क्षेत्रीय संप्रभुता पर दबाव बनाया जा रहा है जो किसी भी तरह से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा नहीं हो सकता. उन्होंने यूरोप के नेताओं को सलाह दी कि इस समस्या का एकमात्र समाधान आर्थिक संप्रभुता को बढ़ाना और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनना है. साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं के फिर से उभरने को लेकर उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका के संघर्षों का उदाहरण देते हुए आगाह किया.
यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप के प्लेन ने हवा में क्यों लिया यू-टर्न? दावोस के लिए उड़ान भरने के बाद लौटा वापस, जानें क्या हुआ
मैक्रों के ब्लू सनग्लासेज का राज
इस संबोधन के दौरान मैक्रों का लुक सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है क्योंकि वह पूरे भाषण के दौरान नीले रंग का चश्मा पहने नजर आए. भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए बताया कि उनकी आंखों में कुछ समस्या है जिसकी वजह से उन्हें चश्मा लगाना पड़ा. फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक उनकी आंखों की एक नस फट गई थी जिससे सूजन और लालिमा आ गई थी जिसके कारण डॉक्टर ने उन्हें धूप और तेज रोशनी से बचने की सलाह दी थी. भले ही यह चश्मा मेडिकल वजहों से था लेकिन उनके इस लुक ने दावोस की महफिल लूट ली और लोगों ने उनके इस बेबाक अंदाज को ट्रंप के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध के रूप में भी देखा.
मैक्रों का कड़ा संदेश
अपने संबोधन के अंत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक बहुत ही पावरफुल बात कही जो सीधे तौर पर ट्रंप के रवैये को जवाब थी. उन्होंने कहा कि हम दुनिया में धमकियों के बजाय सम्मान को पसंद करते हैं और साजिशों के बजाय विज्ञान पर भरोसा करते हैं. मैक्रों ने जोर देकर कहा कि 2026 के दौरान फ्रांस वैश्विक असंतुलन को ठीक करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा. उन्होंने साफ कर दिया कि यूरोप अब अपनी रक्षा और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करेगा ताकि वह किसी भी बाहरी दबाव के सामने न झुके. मैक्रों का यह बयान स्पष्ट करता है कि अब यूरोप अमेरिका की मनमानी को चुपचाप बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और वह क्रूरता के बजाय कानून के शासन को ही प्राथमिकता देगा.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर बिना नाम लिए कड़ा प्रहार करते हुए मैक्रों ने कहा कि दुनिया आज एक नियम-रहित विश्व की ओर बढ़ रही है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कुचले जाने और सिर्फ ताकतवर के कानून के हावी होने पर गहरी चिंता जताई. आसमानी रंग के सनग्लासेज पहनकर मंच पर पहुंचे मैक्रों ने कहा कि साल 2024 में 60 से ज्यादा युद्ध होना एक रिकॉर्ड है और अब टकराव को सामान्य मान लिया गया है. उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ बढ़ती तानाशाही और साइबर से लेकर व्यापार तक फैली हिंसा को वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया.
टैरिफ की धमकियों पर पलटवार
ट्रंप की ओर से 200 फीसदी टैरिफ की धमकी झेल चुके मैक्रों ने खुलकर अमेरिका की व्यापारिक दादागीरी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल अब निर्यात हितों को चोट पहुंचाने और यूरोप को अपने अधीन करने के लिए किया जा रहा है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है. मैक्रों के अनुसार नए-नए टैरिफ लगाकर क्षेत्रीय संप्रभुता पर दबाव बनाया जा रहा है जो किसी भी तरह से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा नहीं हो सकता. उन्होंने यूरोप के नेताओं को सलाह दी कि इस समस्या का एकमात्र समाधान आर्थिक संप्रभुता को बढ़ाना और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनना है. साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं के फिर से उभरने को लेकर उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका के संघर्षों का उदाहरण देते हुए आगाह किया.
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मैक्रों के ब्लू सनग्लासेज का राज
इस संबोधन के दौरान मैक्रों का लुक सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है क्योंकि वह पूरे भाषण के दौरान नीले रंग का चश्मा पहने नजर आए. भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए बताया कि उनकी आंखों में कुछ समस्या है जिसकी वजह से उन्हें चश्मा लगाना पड़ा. फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक उनकी आंखों की एक नस फट गई थी जिससे सूजन और लालिमा आ गई थी जिसके कारण डॉक्टर ने उन्हें धूप और तेज रोशनी से बचने की सलाह दी थी. भले ही यह चश्मा मेडिकल वजहों से था लेकिन उनके इस लुक ने दावोस की महफिल लूट ली और लोगों ने उनके इस बेबाक अंदाज को ट्रंप के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध के रूप में भी देखा.
मैक्रों का कड़ा संदेश
अपने संबोधन के अंत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक बहुत ही पावरफुल बात कही जो सीधे तौर पर ट्रंप के रवैये को जवाब थी. उन्होंने कहा कि हम दुनिया में धमकियों के बजाय सम्मान को पसंद करते हैं और साजिशों के बजाय विज्ञान पर भरोसा करते हैं. मैक्रों ने जोर देकर कहा कि 2026 के दौरान फ्रांस वैश्विक असंतुलन को ठीक करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा. उन्होंने साफ कर दिया कि यूरोप अब अपनी रक्षा और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करेगा ताकि वह किसी भी बाहरी दबाव के सामने न झुके. मैक्रों का यह बयान स्पष्ट करता है कि अब यूरोप अमेरिका की मनमानी को चुपचाप बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और वह क्रूरता के बजाय कानून के शासन को ही प्राथमिकता देगा.