ईरान के क्लस्टर बम हमले से दहला इजरायल, कहा- इसके पीछे रूस या चीन का हाथ
ईरान ने इजरायल पर पहली बार विवादित क्लस्टर बमों से हमला किया है. इजरायल को शक है कि इस घातक तकनीक के पीछे रूस और चीन का हाथ हो सकता है.
Written By Raja Alam

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ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान ने पहली बार इजरायल पर क्लस्टर बमों से लैस बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. क्लस्टर बम आधुनिक युद्ध के सबसे विवादित हथियार माने जाते हैं क्योंकि ये हवा में ही फटकर दर्जनों छोटे बमों को एक बड़े इलाके में फैला देते हैं. इन हथियारों का इस्तेमाल शहरी इलाकों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है क्योंकि ये एक साथ कई किलोमीटर के दायरे में तबाही मचाते हैं. इजरायली सेना के विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिसाइलों के इस्तेमाल से युद्ध का पूरा माहौल बदल गया है क्योंकि इन्हें रोकना सामान्य मिसाइलों के मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण होता है. इजरायल को शक है कि इस घातक तकनीक के पीछे रूस और चीन का हाथ है.
ईरान द्वारा इस घातक तकनीक के इस्तेमाल ने पूरी दुनिया का ध्यान रूस और चीन की तरफ खींच लिया है. इजरायल को शक है कि ईरान ने क्लस्टर हथियारों की यह काबिलियत खुद विकसित नहीं की है बल्कि इसके पीछे रूसी या चीनी सेना का हाथ हो सकता है. रूस पहले भी यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर चुका है जिससे यह आशंका और प्रबल हो गई है. इजरायल का कहना है कि यह केवल एक सैन्य खतरा नहीं है बल्कि यह पता लगाना जरूरी है कि ईरान तक यह तकनीक कैसे पहुंची. इन देशों की संभावित संलिप्तता ने मिडिल ईस्ट के संघर्ष में नई भू-राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ना तय है.
इजरायली सैन्य अधिकारियों के मुताबिक ईरान की मिसाइलों के वॉरहेड जमीन से टकराने से करीब चार से सात किलोमीटर पहले ही हवा में फट जाते हैं. इसमें से निकलने वाले लगभग 20 छोटे बम पांच से आठ किलोमीटर के दायरे में बिखर जाते हैं. हाल ही में एक बम तेल अवीव के पास अजोर शहर में एक घर पर गिरा जिससे इमारत को भारी नुकसान हुआ. एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी से अब तक ईरानी हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है और एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. ईरान ने अपने हमलों के पैटर्न में भी बदलाव किया है और अब वह एक साथ भारी हमले करने के बजाय रुक-रुक कर सटीक क्लस्टर मिसाइलें दाग रहा है.
क्लस्टर बमों को लेकर दुनिया भर में काफी विरोध होता रहा है क्योंकि इनके कई सबम्यूनिशन तुरंत नहीं फटते और लंबे समय तक आम लोगों के लिए खतरा बने रहते हैं. साल 2008 में एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के जरिए 111 देशों ने इन हथियारों के उत्पादन और इस्तेमाल पर रोक लगाई थी. हालांकि हैरानी की बात यह है कि न तो इजरायल और न ही ईरान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यहां तक कि अमेरिका भी इस संधि का हिस्सा नहीं है. ईरान अपने इन हथियारों की क्षमता को बेहद गोपनीय रखता है लेकिन वर्तमान युद्ध में इनका इस्तेमाल यह साबित करता है कि उसने अपनी सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ा लिया है जो अब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है.
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