Explainer: ईरान का नतांज या इजरायल का डिमोना, जंग में किसका परमाणु सेंटर कितना शक्तिशाली?

ईरान का नतांज और इजराइल का डिमोना परमाणु केंद्र इस महाजंग के सबसे संवेदनशील ठिकाने हैं. इन दोनों केंद्रों की परमाणु क्षमता और सुरक्षा तकनीक ही मिडिल ईस्ट का भविष्य तय करेगी.

Natanz vs Dimona nuclear power (1)

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध अब उस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां परमाणु केंद्रों को सीधे निशाना बनाया जा रहा है. शनिवार की रात ईरान ने इजरायल पर अब तक का सबसे खौफनाक मिसाइल हमला किया, जिसमें इजरायल का ‘परमाणु शहर’ कहा जाने वाला डिमोना मुख्य निशाना बना. ईरान का यह पलटवार तब हुआ जब कुछ घंटे पहले इजरायल ने ईरान के नतांज परमाणु सेंटर पर हमला किया था.

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महाजंग के बीच अब सबकी नजरें दोनों देशों के सबसे संवेदनशील ठिकानों यानी उनके परमाणु केंद्रों पर टिक गई हैं. एक तरफ ईरान का ‘नतांज’ (Natanz) है, जो उसके यूरेनियम संवर्धन का सबसे बड़ा केंद्र है. तो दूसरी तरफ इजराइल का रहस्यमयी ‘डिमोना’ (Dimona) प्लांट है, जिसे दुनिया का सबसे सुरक्षित और ताकतवर परमाणु ठिकाना माना जाता है. नतांज ईरान के परमाणु कार्यक्रम की धड़कन है, जो जमीन से सैकड़ों फीट नीचे पहाड़ों में छिपा हुआ है ताकि किसी भी हवाई हमले का इस पर असर न हो. वहीं, डिमोना को इजराइल की ‘परमाणु ढाल’ कहा जाता है, जहां के बारे में दावा किया जाता है कि इजराइल ने यहीं अपने परमाणु बम तैयार किए हैं. इन दोनों केंद्रों की सुरक्षा और उनकी क्षमता ही इस युद्ध का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है.

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ईरान का नतांज

ईरान का नतांज परमाणु केंद्र तेहरान से करीब 225 किलोमीटर दूर एक रेगिस्तानी इलाके में स्थित है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका मुख्य हिस्सा जमीन के काफी नीचे बना हुआ है. जिस पर कंक्रीट की कई परतें चढ़ाई गई हैं. यहां हजारों की संख्या में सेंट्रीफ्यूज लगे हैं, जो यूरेनियम को संवर्धित (Enrich) करने का काम करते हैं. ईरान का दावा है कि यह केंद्र केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यों के लिए है. लेकिन अमेरिका और इजराइल को डर है कि ईरान यहां गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बनाने लायक ईंधन तैयार कर रहा है. हाल ही में हुए हमलों के बावजूद ईरान ने इस केंद्र की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए रूस से मिले खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं. जो इसे किसी भी मिसाइल हमले से बचाने की ताकत देते हैं.

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इजराइल का डिमोना

इजराइल का ‘नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर’ जिसे दुनिया डिमोना के नाम से जानती है. वह दुनिया के सबसे गुप्त स्थानों में से एक है. 1950 के दशक के अंत में बना यह प्लांट इजराइल की परमाणु नीति का मुख्य स्तंभ है. हालांकि इजराइल ने कभी खुलकर स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु बम हैं. लेकिन दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिमोना में ही इजराइल ने अपने 80 से 200 परमाणु हथियार बनाए हैं. इस केंद्र की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इसके ऊपर से परिंदा भी पर नहीं मार सकता. यहां ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ जैसे दुनिया के सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम हर वक्त तैनात रहते हैं. जो ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों को पल भर में राख करने की क्षमता रखते हैं.

दुनिया पर मंडराता ‘रेडिएशन’ का साया

जंग के मौजूदा हालात में सबसे डरावना सवाल यह है कि अगर इनमें से किसी भी केंद्र पर सीधा हमला हुआ तो क्या होगा? अगर नतांज या डिमोना को निशाना बनाया गया. तो वहां से निकलने वाला रेडियोएक्टिव रेडिएशन केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और इजराइल दोनों जानते हैं कि परमाणु केंद्रों पर हमला ‘रेड लाइन’ पार करने जैसा है. यही वजह है कि दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को तो निशाना बना रहे हैं. लेकिन परमाणु केंद्रों को छूने से पहले सौ बार सोच रहे हैं. फिर भी अगर यह जंग बेकाबू हुई. तो इन दोनों केंद्रों की आपसी भिड़ंत पूरी मानवता को खतरे में डाल सकती है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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