Executions in Saudi Arabia: सऊदी अरब में गुनाहों के लिए दोषी को फांसी की सजा देने का नियम है. साल 2019 में मानवाधिकार संगठनों के विरोध और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगने के लिए मौत की सजा देने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन साल 2022 में फिर से ड्रग स्मगलिंग के लिए मौत की सजा का नियम लागू किया गया और तब से अब तक 2 बार सऊदी अरब में फांसी दिए जाने का रिकॉर्ड बन चुका है.
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सबसे ज्यादा ड्रग स्मगलिंग के मामलों में फांसी
ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 356 लोगों को मौत की सजा दी गई और इनमें से 243 लोगों को ड्रग स्मगलिंग से जुड़े मामलों में फांसी दी गई. सऊदी अरब ने लगातार दूसरे साल फांसी का सजा देने का रिकॉर्ड बनाया है. साल 2024 में भी 338 लोगों को फांसी की जा दी गई थी. सरकार का कहना है कि ड्रग स्मगलिंग के उन्मूलन के लिए मृत्युदंड अनिवार्य है, लेकिन मानवाधिकार संगठन इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं.
अचानक क्यों बढ़े फांसी की सजा के मामले?
सऊदी अरब में प्रतिबंधित कैप्टागन ड्रग्स की स्मगलिंग के मामले काफी बढ़ गए हैं, जिनका कनेक्शन सीरिया से है, लेकिन सऊदी अरब की सरकार देश को पूरी दुनिया के लिए टूरिज्म का हब बनाने का विजन अपना चुकी है. वहीं सऊदी अरब साल 2034 का फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी करने की तैयारी में भी जुटा है, इसलिए सऊदी प्रिंस ने ड्रग स्मगलिंग का उन्मूलन करने के लिए स्मगलिंग करने वालों को कड़ी सजा देने की पॉलिसी अपनाई है.
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सऊदी में क्या है फांसी की सजा का नियम?
बता दें कि सऊदी अरब में फांसी की सजा देने का कानून शरिया कानून पर आधारित है. यहां अपराधों को 3 श्रेणियों हुदूद (Hudud), किसास (Qisas) और ताजीर (Ta’zir) में बांटकर सजा का प्रावधान किया गया है. हुदूद के तहत व्यभिचार, धर्म का त्याग, डकैती, समलैंगिता आदि अपराधों को शामिल किया गया है, जिसमें किसी विवाहित के लिए व्याभिचार करने पर पत्थर मार-मारकर मौत की सजा दी जाती है, जो पिछले कुछ सालों में किसी को नहीं दी गई.
किसास के तहत अगर किसी का मर्डर कर दिया जाता है तो दोषी को फांसी की सजा दी जा सकती हैं, लेकिन यह पीड़ित के परिवार की मर्जी पर निर्भर होगा. अगर परिवार को प्रतिशोध चाहिए तो दोषी को फांसी होगी, वहीं अगर कोई ब्लड मनी देकर दोषी को सजा से बचाना चाहता तो उसे माफ करना या नहीं करना भी पीड़ित परिवार पर निर्भर करेगा. ताजीर के तहत कुछ अपराधों के लिए कोर्ट में जिरह की जाती है और जज अपने विवेक से सजा सुनाएगा.
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सऊदी किंग या प्रिंस की मंजूरी भी अनिवार्य
ताजीर के तहत ड्रग स्मगलिंग, आतंकी हमले, जादू-टोना करके किए गए अपराध, राजद्रोह, बलात्कार आदि मामले आते हैं. वहीं इन मामलों के आरोपियों के पहले ट्रायल कोर्ट में केस चलता है. फर 5 जजों के पैनल वाली अपील कोर्ट केस की सुनवाई करती है, जिसकी सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट मामले का रिव्यू करती है और सजा का ऐलान करती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जो सजा सुनाई है, वह देनी है या नहीं, उसके लिए सऊदी किंग या क्राउन प्रिंस की मंजूरी अनिवार्य है.
सऊदी अरब में मौत की सजा न सिर्फ फांसी पर लटकाकर दी जाती है, बल्कि लोगों के सामने पब्लिकली तलवार से सिर काट कर सजा दी जाती है. कुछ मामलों में सरेआम गोलियां मारने का प्रावधान है, लेकिन सिर धड़ से अलग करने की सजा आमतौर पर दी जाती है. नाबालिगों को मृत्युदंड देने पर पूरी तरह रोक लग गई थी, लेकिन साल 2025 में वेश्यावृत्ति से जुड़े मामलों में नाबालिगों को भी मौत की सजा दी गई, जो मानवाधिकार अधिनियम का उल्लंघन है.
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दुनिया के कितनों देशों में मृत्युदंड का नियम?
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के 50 से ज्यादा देशों में मौत की सजा देने का कानून है और इनमें से 20 से ज्यादा देशों में पिछले 10 साल में किसी को मृत्युदंड दिया ही नहीं गया है. 100 से ज्यादा देश मृत्युदंड का प्रावधान खत्म कर चुके हैं और कुछ देशों ने मृत्युदंड देने पर रोक लगा रखी है. भारत में भी मृत्युदंड देने का कानून है, लेकिन साल 2020 के बाद किसी को मौत की सजा नहीं दी गई है. 2024-2025 में जिम्बाब्वे और घाना ने मृत्युदंड के कानून को खत्म किया है.










