नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र को अंतिम रूप देने में सदस्य देशों के बीच लंबी बातचीत चली. पश्चिम एशिया की स्थिति, खासकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अलग-अलग रुख के कारण सहमति बनाना आसान नहीं था. रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत शनिवार तड़के करीब 4 बजे तक चली. भारत की अध्यक्षता में आखिरकार सदस्य देशों के बीच ऐसा रास्ता निकाला गया, जिस पर सभी देश सहमत हो गए.

नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई है. ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है. साथ ही नागरिकों और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर जोर दिया गया है.

---विज्ञापन---

गाजा और फिलिस्तीन पर स्पष्ट रुख

घोषणापत्र में गाजा की स्थिति को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं. ब्रिक्स देशों ने युद्धविराम को बनाए रखने और गाजा में मानवीय सहायता की पहुंच बिना किसी रोक के होनी चाहिए. इसके साथ ही फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने वाली किसी भी नीति का विरोध किया गया है. घोषणापत्र में कहा गया है कि फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय और वापसी के अधिकारों को सुनिश्चित करना जरूरी है.

ब्रिक्स ने फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता दिलाने के समर्थन को भी दोहराया है. दस्तावेज में दो-राष्ट्र समाधान को स्थायी शांति का आधार बताया गया है. इसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना और पूर्वी यरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की बात कही गई है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें- BRICS Summit 2026: LAC पर शांति, व्यापार में संतुलन… मोदी-जिनपिंग की मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

ईरान और UAE के बीच मतभेद बना चुनौती

नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनाना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि ब्रिक्स में शामिल ईरान और UAE पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष को लेकर अलग-अलग परिस्थितियों में थे. दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद भारत ने बातचीत के जरिए ऐसी भाषा तैयार कराने में भूमिका निभाई, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें. यही वजह है कि संयुक्त बयान को भारत की कूटनीतिक सफलता के तौर पर भी देखा जा रहा है.

---विज्ञापन---

घोषणापत्र में संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिक माध्यम बताया गया है. साथ ही वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन, ऊर्जा प्रवाह और समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है.

इसके अलावा ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई. आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत भी बताई गई है.

---विज्ञापन---