ईरान से युद्ध के बीच ट्रंप के लिए बुरी खबर, नए टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति के खिलाफ 20 राज्यों ने दर्ज कराया मुकदमा

Donald Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा लगाए गए नए टैरिफ के खिलाफ भी केस दायर किया गया है। करीब 20 राज्यों ने नए टैरिफ को भी रद्द करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के फेसले के बाद उन्होंने दुनियाभर के देशों पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाए थे।

donald trump tariffs

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को अवैध करार दिया है।

Donald Trump New Tariffs: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच ट्रंप के लिए बुरी खबर आई। एक ओर ईरान पर हमले के कारण वे आलोचना झेल रहे हैं। दूसरी ओर, नए टैरिफ के खिलाफ भी कोर्ट केस दायर हो गया है। अमेरिका के ही करीब 20 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगाए गए नए टैरिफ को लेकर मुकदमा दायर किया है। आरोप हैं कि ट्रंप अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और व्यापार घाटा कम नहीं हो रहा, इसलिए नए टैरिफ रद्द किए जाएं।

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इन 20 राज्यों में कोर्ट में मुकदमा दायर किया

बता दें कि कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनोइस, मेन, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ कैरोलिना, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वर्जीनिया, वाशिंगटन, विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल, केंटकी और पेंसिल्वेनिया के गवर्नर ने मुकदमा दायर किया है। वहीं मुकदमे की अगुवाई ओरेगन, एरिजोना, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल कर रहे हैं। इनकी तरफ से याचिका दायर की गई और वकील को हायर करके दलीलें देने को कहा गया।

याचिका में राज्यों ने ट्रंप पर लगाया आरोप

ओरेगॉन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड कहते हैं कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध करार दिया था और सरकार को लोगों के पैसे वापस करने चाहिए। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने धारा 122 का हवाला देकर 15 प्रतिशत नया टैरिफ लगा दिया। इससे राज्य सरकारों, बिजनेस-इंडस्ट्री और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ गई है। एरिजोना के अटॉर्नी जनरल क्रिस मेस कहते हैं कि टैरिफ का बोझ अमेरिकियों पर ही पड़ता है और यह बोझ प्रति परिवार प्रति वर्ष 1200 डॉलर है। यह पैसा उन अमेरिकी परिवारों की जेब से निकलता है जो किराने का सामान खरीदने आते हैं। किराया भरते हैं या छोटे बिजनेस चलाते हैं।

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ट्रंप में पक्ष में क्या बोला व्हाइट हाउस?

वहीं व्हाइट हाउस ने कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने अधिकार क्षेत्र के दायरे में ही काम कर रहे हैं। देश को बड़े और गंभीर नुकसान से बचाने के लिए टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए टैरिफ लगाना अनिवार्य है। 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत नया टैरिफ तब लगाया गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। धारा 122 राष्ट्रपति को 15% तक का टैरिफ लगाने की अनुमति देती है, जो 5 महीने तक लागू रहते हैं और चाहें तो इस समयावधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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कई वादी राज्यों ने एक अलग कानून, अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ भी सफलतापूर्वक मुकदमा दायर किया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 फरवरी को उनके व्यापक आईईईपीए टैरिफ को रद्द करने के चार दिन बाद, ट्रंप ने धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए विदेशी वस्तुओं पर 10% टैरिफ लगा दिया। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को सीएनबीसी को बताया कि प्रशासन इस सप्ताह टैरिफ को बढ़ाकर 15% की सीमा तक ले जाएगा।

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धारा 122 का प्रावधान “बुनियादी अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं” को लक्षित करता है। मुद्दा यह है कि क्या यह शब्दावली व्यापार घाटे को भी कवर करती है, यानी अमेरिका द्वारा अन्य देशों को बेची जाने वाली वस्तुओं और उनसे खरीदी जाने वाली वस्तुओं के बीच का अंतर।

धारा 122 का उद्भव 1960 और 1970 के दशक में उत्पन्न वित्तीय संकटों से हुआ, जब अमेरिकी डॉलर सोने से जुड़ा हुआ था। अन्य देश निर्धारित दर पर सोने के बदले डॉलर बेच रहे थे, जिससे अमेरिकी मुद्रा के पतन और वित्तीय बाजारों में अराजकता का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन अब डॉलर सोने से जुड़ा हुआ नहीं है, इसलिए आलोचकों का कहना है कि धारा 122 अप्रचलित हो गई है।

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ट्रम्प के लिए अजीब बात यह थी कि उनके अपने न्याय विभाग ने पिछले साल अदालत में दायर एक याचिका में तर्क दिया था कि राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों अधिनियम को लागू करने की आवश्यकता थी क्योंकि धारा 122 का व्यापार घाटे से निपटने में “कोई स्पष्ट अनुप्रयोग नहीं था”, जिसे उसने भुगतान संतुलन के मुद्दों से “वैचारिक रूप से भिन्न” बताया था।

फिर भी, कुछ कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि इस बार ट्रंप प्रशासन का मामला अधिक मजबूत है।

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जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक कानून संस्थान के विजिटिंग स्कॉलर पीटर हैरेल ने बुधवार को एक टिप्पणी में लिखा, “कानूनी वास्तविकता यह है कि अदालतें संभवतः धारा 122 के संबंध में राष्ट्रपति ट्रम्प को आईईईपीए के तहत उनके पिछले टैरिफ की तुलना में कहीं अधिक सम्मान प्रदान करेंगी।”

न्यूयॉर्क स्थित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेष अदालत, जो राज्यों के मुकदमे की सुनवाई करेगी, ने पिछले साल आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द करने के अपने फैसले में लिखा था कि ट्रंप को उनकी जरूरत नहीं थी क्योंकि व्यापार घाटे से निपटने के लिए धारा 122 उपलब्ध थी।

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ट्रंप के पास टैरिफ लगाने के लिए अन्य कानूनी अधिकार भी हैं, और इनमें से कुछ पहले ही अदालती परीक्षणों में खरे उतर चुके हैं। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 1974 के उसी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत चीनी आयात पर जो शुल्क लगाए थे, वे अभी भी लागू हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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