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AMU अब सिर्फ 4 रुपये में देगा ग्रीन ईंट! सर्दी में कमरा रहेगा गर्म और गर्मियों में मिलेगी ठंडक

Low Cost Eco Friendly Bricks: यूपी के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने प्राकृतिक सामग्री को मिलाकर ऐसी ग्रीन ईंट तैयार की है, जो सामान्य ईंटों की तुलना में आधी कीमत पर मिलती है. साथ ही इसके इस्तेमाल से काफी फायदा मिलता है, आइए जानते हैं जब इन ईंटों का टेस्ट हुआ, तो उसमें क्या सामने आया?

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किसी भी घर की निर्माण में दीवारों की भूमिका बहुत अहम होती है, जो सर्दी, गर्मी बारिश आदि कई चीजों से बचाती है. लेकिन क्या हो अगर आपको कहा जाए कि आप अब बहुत कम कीमत पर ऐसी ईंटे ला सकते हैं, जो आपके घर को सर्दी में गर्म रखेंगी और गर्मियों में ठंडा? ये सुनकर आपको हैरानी हो सकती है, लेकिन उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने गोबर, राख और चूने से ऐसी ग्रीन ईंट बनाई है, जिसमें खर्च महज चार रुपये होता है. यह ईंट सामान्य ईंटों से बहुत सस्ती है और साथ ही इसे इस्तेमाल करने के फायदे भी बहुत हैं.

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सामान्य ईंटों से कितना अलग?

यह ग्रीन ईंट (Green Bricks) मार्केट में मिलने वाली सामान्य ईंटों की तुलना में आधी कीमत की है. बता दें कि सामान्य ईंट जो लगभग 8 रुपये की बिकती है, उसके सामने यह महज 4 रुपये की है. इतना ही नहीं, सामान्य ईंट लगभग ढाई किलो की होती है, उसके सामने AMU की ग्रीन ईंट का वजन सिर्फ 900 ग्राम यानी 60 फीसदी तक हल्की है. इससे अनुमान लगा सकते हैं कि अगर आप अपने घरों में इस ईंट का इस्तेमाल करेंगे तो आपके कितने पैसे बच सकते हैं.

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प्राकृतिक तरीके से हुआ ईंटों का निर्माण

अब सवाल उठता है कि कीमत के अलावा इसमें क्या खास है? रिपोर्ट बताते हैं कि एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मेहमूद अनवर का कहना है कि सामान्य की तुलना में ग्रीन ईंट का वजन कम होने से इमारतों के पिलर और ढांचे पर बोझ कम पड़ेगा. इसे बनाने के लिए 25 फीसदी गोबर, 60 फीसदी फ्लाई ऐश, पांच फीसदी चूना और 10 फीसदी मिट्टी का मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है. इतना हीं नहीं, जिस तरह सामान्य ईंटों की आग में पकाने की जरूरत पड़ती है, इसका निर्माण उससे एकदम उलटा है, यह हवा और धूप में सुखाकर बनाया जाता है.

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परीक्षण क्या निकला रिजल्ट?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रो.अनवर का दावा है कि यह ईंट ऊष्मा रोधी (Thermal Insulative) है. ऐसे खास प्राकृतिक तरीके से बनाए गए ईंट का इस्तेमाल अगर कोई घर में करता है, तो इससे उसका घर सर्दी में खुद गर्म रहेगा और गर्मी में अंदर से ठंडक देने का काम करेगा. प्रयोगशाला के परीक्षण में ईंट की संपीडन शक्ति (Compressive Strength) लगभग 16.5 एमपीए तक पाई गई, जो पारंपरिक ईंटों के बराबर या बेहतर मानी जाती है, वहीं, जल अवशोषण दर 12.7% से 17.2% के बीच रही, जो मानकों के अनुरूप पाई गई है.

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First published on: Feb 25, 2026 03:19 PM

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About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधित खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. इससे पहले वह India.com में ट्रेनी के रूप में जुड़े थे, जहां उन्होंने ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखा. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें India News और Khabar Fast जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधित खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. इससे पहले वह India.com में ट्रेनी के रूप में जुड़े थे, जहां उन्होंने ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखा. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें India News और Khabar Fast जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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