मकान खरीदने वालों के लिए एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है. किसी भी शहर में घर या प्लॉट खरीदने के बाद ज्यादातर लोगों को लगता है कि सिर्फ रजिस्ट्री (सेल डीड) करा लेने से वे प्रॉपर्टी के पक्के मालिक बन गए हैं. हालांकि, कानूनन रजिस्टर्ड सेल डीड संपत्ति के ट्रांसफर का एक अहम सबूत तो है, लेकिन यह अकेले मालिकाना हक का अंतिम और पक्का प्रमाण नहीं मानी जाती. भारतीय कानून के अनुसार, 100 रुपये से अधिक की संपत्ति का लेनदेन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सेल डीड से ही पूरा होता है, लेकिन असली मालिकाना हक साबित करने के लिए प्रॉपर्टी का क्लियर टाइटल और पुरावे दस्तावेजों की जांच बेहद जरूरी होती है. आसान शब्दों में कहें तो टाइटल का मतलब बेचने वाले का वह कानूनी अधिकार है जिससे यह तय होता है कि संपत्ति पर कोई पुराना विवाद, बकाया या अवैध कब्जा नहीं है.
मालिकाना हक साबित करने वाले जरूरी दस्तावेज
किसी भी प्रॉपर्टी पर पूर्ण कानूनी मालिकाना हक स्थापित करने के लिए रजिस्टर्ड सेल डीड के साथ-साथ ओरिजिनल टाइटल डीड (पुराने मालिकाना हक का रिकॉर्ड) होना आवश्यक है. इसके अलावा, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) यह बताता है कि संपत्ति पर कोई गिरवी या लोन तो नहीं है, जबकि पजेशन लेटर और प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें वास्तविक कब्जे और भुगतान का प्रमाण देती हैं. नई इमारतों के मामले में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC), कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान यह साबित करते हैं कि निर्माण सरकारी नियमों के तहत हुआ है. रजिस्ट्री के बाद नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराना भी जरूरी होता है. भले ही म्यूटेशन से सीधे मालिकाना हक न मिले, लेकिन इससे सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज हो जाता है जिससे भविष्य में टैक्स, बिजली-पानी कनेक्शन और रीसेल में परेशानी नहीं आती.
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घर खरीदने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
घर या जमीन खरीदने जैसा बड़ा फैसला लेते समय पूरी ‘टाइटल चेन’ की जांच करना बेहद जरूरी होता है, ताकि यह पता चल सके कि संपत्ति एक मालिक से दूसरे मालिक को सही तरीके से ट्रांसफर हुई है या नहीं. केवल किसी मकान में लंबे समय तक रहने या किराए पर रहने से कोई कानूनी मालिक नहीं बन जाता, इसके लिए वैध दस्तावेज होना अनिवार्य है. धोखाधड़ी, विरासत के झगड़ों और भविष्य के कानूनी विवादों से बचने के लिए बेचने वाले की ओनरशिप हिस्ट्री जांचें और सभी सरकारी मंजूरियों की पुष्टि करें. इसके साथ ही, खरीदारी के तुरंत बाद बिजली, पानी और अन्य आवश्यक कनेक्शन अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लें. किसी भी बड़ी प्रॉपर्टी डील से पहले किसी लीगल एक्सपर्ट से दस्तावेजों की कानूनी जांच करवा लेना भविष्य के बड़े नुकसान से बचा सकता है.
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