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भारत के इस राज्य में 5 साल के अंदर बनेंगे 1750 नए पुल! 11,800 की लागत से बदलेगी गांवों की तस्वीर?

Odisha News: हम अक्सर देखने हैं कि कई दूर दराज वाले इलाके और गांव में पक्के पुल की कमी होती है, जिससे उस जगह संपर्क राज्य के अहम शहरों से टूटा रहता है. इसी के मद्देनजर ओडिशा सरकार ने 5 सालों में हजारों पुल बनाने का प्लान बनाया है जिससे ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा.

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मुख्य बिंदु

ओडिशा सरकार अगले 5 सालों में 1,750 नए पुल बनाएगी.
ब्रिज प्रोग्राम के लिए तकरीबन 11,800 करोड़ आवंटित किए गए हैं.
राज्य सरकार की ये पहल ‘सेतु बंधन योजना’ के तहत लागू की जाएगी.
600 करोड़ रुपये की अलग ‘ब्रिज-कम-वियर स्कीम’ पानी बचाने में मदद करेगी.
इन प्रोजेक्ट्स के तहत आदिवासी और दूर-दराज इलाकों को प्रायोरिटी दी जाएगी.

Odisha to Build 1750 Rural Bridges in 5 Years: ओडिशा सरकार ने राज्य भर में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने और जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए अगले 5 सालों में 1,750 नए पुल बनाने की एक बड़े प्लान का ऐलान किया है. 11,800 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाली इस पहल का मकसद सड़क के अधूरे लिंक को पूरा करना और ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में साल भर ट्रांसपोर्ट की सुविधा देनी है.

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‘हर साल 350 पुल बनेंगे’

पुल निर्माण कार्यक्रम ‘सेतु बंधन योजना’ (SBY) के तहत लागू किया जाएगा, जिसे पहले ‘बीजू सेतु योजना’ (BSY) के नाम से जाना जाता था. राज्य ने इस प्लान को अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) के लिए बढ़ा दिया है, जिसमें हर साल 350 पुल बनाने का टारगेट रखा गया है.

कई प्रोजेक्टस होंगे शामिल

ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, इस कार्यक्रम में कुल 3,167 पुल प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे. इसमें पिछले सालों से चल रही 1,417 परियोजनाएं और 1,750 नए मंजूर किए गए पुल शामिल हैं. सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि उसके बाद के 4 सालों में से हर साल के लिए 2,400 करोड़ रुपये तय किए गए हैं.

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नए पुलों से होंगे फायदे

अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा के कई गांवों में मॉनसून के दौरान नदियों, नालों और जल निकासी चैनलों की वजह से वाहनों की आवाजाही में रुकावट आती है. नए पुलों से साल भर बिना रुकावट रोड कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है, जिससे स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और सरकारी सेवाओं तक पहुंचना आसान हो जाएगा. बेहतर रोड नेटवर्क से गांव के लोगों के लिए ट्रैवल टाइम और सफर में आने वाला खर्च भी कम होने की उम्मीद है.

सभी जिलों की बदलेगी तस्वीर!

ये योजना ओडिशा के सभी जिलों में लागू की जाएगी, जिसमें आदिवासी, दूर-दराज और विकास का इंतजार कर रहे इलाकों पर खास ध्यान दिया जाएगा जहां बुनियादी ढांचे की कमी अभी भी ज्यादा है. ‘रूरल वर्क्स ऑर्गनाइजेशन’ प्रोजेक्ट के काम की देखरेख करेगा, जबकि 2 लेवल क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम और एक इंडिपेंडेंट थर्ड-पार्टी इवैल्युएशन कंस्ट्रक्शन के स्टैंडर्ड को एनश्योर करेगा और कार्यक्रम के लंबे समय के सामाजिक और आर्थिक असर का आकलन करेगा.

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पुलों के पास पानी रोकने की तैयारी

ब्रिज के कंस्ट्रक्शन के अलावा, राज्य सरकार ने 600 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के साथ एक अलग ‘ब्रिज-कम-वियर स्कीम’ भी शुरू की है. 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 670 प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे, जिनमें 162 चल रहे काम और 508 नए स्ट्रक्चर शामिल हैं. इन प्रोजेक्ट्स को पुलों के पास पानी रोकने वाले सिस्टम बनाकर पानी बचाने, ग्राउंड वाटर रिचार्ज और सिंचाई में सुधार करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन और ग्रामीण इलाकों के सस्टेनेबल डेवलपमेंट, दोनों को बढ़ावा मिलेगा.

निष्कर्ष

ओडिशा के बड़े पैमाने पर ब्रिज डेवलपमेंट प्रोग्राम से राज्य भर में हर मौसम में रोड सर्विस मिलने से रूरल कनेक्टिविटी में बदलाव आने की उम्मीद है. ट्रैवल टाइम कम करने और ट्रांसपोर्टेशन में सुधार के साथ-साथ, ये पहल हजारों गांवों के लिए हेल्थकेयर, शिक्षा और बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाएगी. साथ ही ‘ब्रिज-कम-वियर स्कीम’ पानी बचाने और सिंचाई के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेगी. ये सभी प्रोजेक्ट्स मिलकर राज्य सरकार की उस लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी को दिखाते हैं जिसका मकसद रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, आर्थिक मौकों को बढ़ाना और कम सुविधा वाले इलाकों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है.

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Frequently Asked Questions

राज्य की योजना अगले 5 सालों में 1,750 नए पुल बनाने की है.
अनुमानित निवेश लगभग 11,800 करोड़ रुपये है.
ये प्रोजेक्ट्स 'सेतु बंधन योजना' (SBY) के तहत पूरे किए जाएंगे.
ये प्रोजेक्ट्स 'सेतु बंधन योजना' (SBY) के तहत पूरे किए जाएंगे.
पुल निर्माण के लिए दूर-दराज, आदिवासी और कम विकास वाले जिलों को प्रायोरिटी दी जाएगी.
इस प्रोजेक्ट का मकसद पुलों के साथ पानी रोकने वाले स्ट्रक्चर बनाकर पानी बचाने, ग्राउंडवाटर रिचार्ज और सिंचाई में सुधार करना है.
First published on: Jul 13, 2026 02:44 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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