पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान: क्या वोटिंग ट्रेंड सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज. पिछले चुनावी ट्रेंड बताते हैं कि बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत सरकार के लिए चुनौती बन सकता है. पढ़िये प्रशांत देव की खास रिपोर्ट.

Untitled design - 2026-04-24T180809.064
विज्ञापन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है. पिछले चार–पांच विधानसभा चुनावों के मतदान प्रतिशत पर नजर डालें तो एक दिलचस्प ट्रेंड दिखाई देता है. आंकड़े बताते हैं कि जब भी वोट प्रतिशत बढ़ा है, सत्ता में बदलाव देखने को मिला है, जबकि मतदान प्रतिशत घटने पर मौजूदा सरकार को नुकसान नहीं हुआ और सत्ता बरकरार रही. अब अगर पिछले चुनावों के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह बनती है.

साल 2006 के विधानसभा चुनाव में करीब 81.97 फीसदी मतदान हुआ था. उस समय राज्य में वाममोर्चा और सीपीएम की सरकार थी. इसके बाद 2011 के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 84.33 फीसदी पहुंच गया. इस बढ़े हुए मतदान के साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आ गई. यानी मतदान प्रतिशत में उछाल के साथ सरकार बदल गई.

Advertisment

इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर करीब 83.2 फीसदी रह गया. 2011 की तुलना में वोटिंग कम हुई और तृणमूल कांग्रेस की सरकार दोबारा सत्ता में लौट आई. फिर 2021 के चुनाव में भी मतदान प्रतिशत में हल्की गिरावट देखने को मिली. 2016 में जहां लगभग 83.02 फीसदी वोट पड़े थे, वहीं 2021 में यह आंकड़ा करीब 82.3 फीसदी रहा. इस बार भी टीएमसी सत्ता बचाने में सफल रही.

लेकिन अब 2026 के चुनाव में तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है. पहले चरण में करीब 93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी बड़ा उछाल माना जा रहा है. यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बढ़ा हुआ मतदान इस बार भी सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहा है.
इस विश्लेषण की सबसे बड़ी वजह 2011 का चुनाव है. उस समय भी मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी और राज्य में सरकार बदल गई थी. अब 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान को उसी ट्रेंड से जोड़कर देखा जा रहा है.

हालांकि यह सिर्फ मतदान प्रतिशत के आधार पर किया गया एक राजनीतिक विश्लेषण है. चुनावी नतीजे केवल वोटिंग प्रतिशत से तय नहीं होते, बल्कि उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन और क्षेत्रीय समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. फिर भी पिछले चार–पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़े यही संकेत देते हैं कि पश्चिम बंगाल में बढ़ा हुआ मतदान अक्सर सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बनता रहा है और विपक्ष को फायदा पहुंचाता रहा है.

विज्ञापन

हालांकि अंतिम फैसला तो मतगणना के दिन ही होगा. लेकिन फिलहाल रिकॉर्ड मतदान ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और कड़े मुकाबले वाला होने जा रहा है.

विज्ञापन

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ