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क्या चुनाव आयोग ने लांघी सीमाएं? SIR की कानूनी वैधता पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

SIR hearing on Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज चुनाव आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान की वैधता पर बड़ा फैसला सुनाएगा. विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि आयोग ने लाखों मतदाताओं के नाम काटकर अपनी सीमाएं लांघी हैं. अकेले पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले करीब 91 लाख वोटर्स के नाम सूची से हटाए गए हैं.

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SIR hearing on Supreme Court: देश की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट आज (बुधवार) निर्वाचन आयोग के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान की कानूनी वैधता पर अपना सबसे बड़ा फैसला सुनाएगा. इस मामले को संविधान लागू होने के बाद से देश के चुनावी ढांचे की सबसे बड़ी न्यायिक समीक्षा माना जा रहा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ इस पर अपना अंतिम निर्णय देगी.

क्या है यह पूरा विवाद?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार से इस विशेष अभियान (SIR) की शुरुआत की थी, जिसे बाद में पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में भी लागू किया गया. इसके तहत उन मतदाताओं से भारतीय नागरिक होने के दस्तावेजी सबूत मांगे गए थे, जिनका रिकॉर्ड साल 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा था. शुरू में आयोग ने इसके लिए 11 कठिन श्रेणियों के दस्तावेज मांगे थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सूची में राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अन्य दस्तावेज भी शामिल किए गए.

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याचिकाकर्ताओं के गंभीर आरोप

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) और मनोज झा, महुआ मोत्रा व केसी वेणुगोपाल जैसे विपक्षी नेताओं ने इस अभियान के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए चुनाव आयोग ने खुद को ‘नागरिकता सत्यापन प्राधिकरण’ में बदल दिया, जो कि उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

दलील दी गई है कि कानूनन नागरिकता तय करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार और फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के पास है, चुनाव आयोग के पास नहीं. विपक्ष का दावा है कि अकेले पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले करीब 91 लाख से अधिक (लगभग 11.88%) मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए, जो कि नागरिकों के अधिकारों का हनन है.

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चुनाव आयोग का क्या है तर्क?

दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने अदालत में अपनी कार्रवाई को संवैधानिक रूप से जरूरी और सही बताया है. आयोग का तर्क है कि वह किसी की नागरिकता तय नहीं कर रहा था, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित कर रहा था कि कोई भी गैर-नागरिक या अवैध व्यक्ति भारत की मतदाता सूची में शामिल होकर मतदान न कर सके. अब देखना यह होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत इस बेहद संवेदनशील और बड़े मामले पर आज क्या रुख अपनाती है.

First published on: May 27, 2026 06:43 AM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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