अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर अभी बवाल खत्म नहीं हुआ है कि इस बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी परिसर विवाद को लेकर मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है. ज्ञानवापी परिसर में हिंदुओं को देवी-देवताओं की पूजा की इजाजत दी जाए या नहीं. इस सवाल के जवाब और फैसले के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर किसी भी तरह का फैसला सुनाने की बजाय हिंदू और मुस्लिम पक्षों के सामने समझौता कराने का प्रस्ताव रख दिया. हालांकि दोनों पक्षों के इस प्रस्ताव पर असहमति के बावजूद आज यानी 14 जुलाई को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है.
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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था मध्यस्थता का प्रस्ताव
आपको बता दें कि बीते सोमवार सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी विवाद को विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के जरिए निपटाने का सुझाव दिया था, जिसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने संबंधित पक्षकारों को कचहरी परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में तलब किया है. यहां चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव और सिविल जज राजीव मुकुल पांडेय करेंगे. बैठक से पहले ही दोनों पक्षों ने अपना रुख साफ कर दिया है. मंदिर पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने साफ शब्दों में कहा कि उनका पक्ष मध्यस्थता के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है.
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हिंदू और मुस्लिम पक्ष का क्या है तर्क?
विष्णु शंकर जैन का तर्क है कि इस विवाद की प्रकृति ऐसी है कि यह लोक अदालत के दायरे में आता ही नहीं. दूसरी ओर, अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और सुप्रीम कोर्ट को इसे देश में लंबित लाखों अन्य मुकदमों से अलग नजरिए से देखना चाहिए. गौरतलब है कि वाराणसी की जिला एवं सत्र अदालत में ज्ञानवापी से जुड़ी करीब 36 फाइलें पहले से ही विचाराधीन हैं, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं.
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर अभी बवाल खत्म नहीं हुआ है कि इस बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी परिसर विवाद को लेकर मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है. ज्ञानवापी परिसर में हिंदुओं को देवी-देवताओं की पूजा की इजाजत दी जाए या नहीं. इस सवाल के जवाब और फैसले के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर किसी भी तरह का फैसला सुनाने की बजाय हिंदू और मुस्लिम पक्षों के सामने समझौता कराने का प्रस्ताव रख दिया. हालांकि दोनों पक्षों के इस प्रस्ताव पर असहमति के बावजूद आज यानी 14 जुलाई को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है.
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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था मध्यस्थता का प्रस्ताव
आपको बता दें कि बीते सोमवार सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी विवाद को विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के जरिए निपटाने का सुझाव दिया था, जिसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने संबंधित पक्षकारों को कचहरी परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में तलब किया है. यहां चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव और सिविल जज राजीव मुकुल पांडेय करेंगे. बैठक से पहले ही दोनों पक्षों ने अपना रुख साफ कर दिया है. मंदिर पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने साफ शब्दों में कहा कि उनका पक्ष मध्यस्थता के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है.
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हिंदू और मुस्लिम पक्ष का क्या है तर्क?
विष्णु शंकर जैन का तर्क है कि इस विवाद की प्रकृति ऐसी है कि यह लोक अदालत के दायरे में आता ही नहीं. दूसरी ओर, अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और सुप्रीम कोर्ट को इसे देश में लंबित लाखों अन्य मुकदमों से अलग नजरिए से देखना चाहिए. गौरतलब है कि वाराणसी की जिला एवं सत्र अदालत में ज्ञानवापी से जुड़ी करीब 36 फाइलें पहले से ही विचाराधीन हैं, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं.