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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

डूबता जोशीमठः देहरादून में हाईलेवल मीटिंग, CM धामी बोले- डेंजर जोन को तुरंत खाली कराएं अधिकारी

Uttarakhand News: उत्तराखंड (Uttarakhand) के जोशीमठ (Joshimath) में आई आपदा से निपटने के लिए राज्य की राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Cm Pushkar Singh Dhami) की अध्यक्षता में हाईलेवल की बैठक चल रही है। इस बैठक में सीएम धामी ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र से लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने […]

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Edited By : Naresh Chaudhary Updated: Jan 6, 2023 19:32

Uttarakhand News: उत्तराखंड (Uttarakhand) के जोशीमठ (Joshimath) में आई आपदा से निपटने के लिए राज्य की राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Cm Pushkar Singh Dhami) की अध्यक्षता में हाईलेवल की बैठक चल रही है।

इस बैठक में सीएम धामी ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र से लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य के आपदा नियंत्रण कक्ष को तत्काल सक्रिय करने के लिए कहा है।

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बैठक में सरकार के ये अधिकारी हैं मौजूद

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ में जमीन धंसने के मुद्दे पर देर शाम एक उच्च स्तरीय बैठक की। देहरादून में हो रही इस बैठक में उत्तराखंड के मुख्य सचिव के अलावा डीजीपी, आपदा, सिंचाई एवं गृह विभाग के अधिकारी, आईजी एसडीआरएफ, आयुक्त गढ़वाल संभाग और जिलाधिकारी चमोली भी शामिल हुए हैं।

सीएम बोले- सुरक्षित स्थान पर तुरंत बनाएं अस्थायी पुनर्वास केंद्र

एजेंसी के मुताबिक बैठक अभी जारी है। उत्तराखंड के सीएम ने निर्देश दिए हैं कि जोशीमठ में सुरक्षित स्थान पर तत्काल एक बड़ा अस्थाई पुनर्वास केंद्र बनाया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि डेंजर जोन को तत्काल खाली किया जाए। राज्य के आपदा नियंत्रण कक्ष को सक्रिय किया जाए।

घरों, सड़कों और होटलों में आई दरारें, बढ़ रही हैं

बता दें कि उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने और मकानों-होटलों में दरारों के मामला लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जोशीमठ प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 561 घरों में दरारें आई हैं। गुरुवार रात और शुक्रवार को कई ताजा मामले भी सामने आए हैं। इलाके कई होटल झुक गए हैं। जमीन को फाड़ कर पानी बाहर आने लगा है।

आपदा प्रबंधन सचिव ने किया दौरा

शुक्रवार को राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन सचिव ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जमीन से तेज प्रवाह के साथ पानी आना खतरे की घंटी है। उन्होंने बताया कि जमीन से पानी आने का मतलब है कि जमीन के नीचे खाली स्थान बन रहा है। ऐसे में जमीन के धंसने या डूबने का खतरा ज्यादा रहता है। स

First published on: Jan 06, 2023 07:32 PM

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