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मेरठ से गाजियाबाद तक उमड़ा जनसैलाब, संजय सिंह की ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में फूंकी बदलाव की नई हवा

मेरठ से शुरू हुई संजय सिंह की 'रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो' पदयात्रा गाजियाबाद में ऐतिहासिक समर्थन के साथ संपन्न हुई यात्रा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रोजगार, सामाजिक न्याय और युवाओं के मुद्दों को नई राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया

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मेरठ की पावन धरती से 16 मई 2026 को शुरू हुई ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा आज 20 मई को गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में ऐतिहासिक जनसमर्थन के साथ समापन हो गया., लेकिन जिस जनभावना को इस यात्रा ने जन्म दिया है, वह अब पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़े बदलाव का संकेत बन चुकी है. पांच दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जो दृश्य दिखाई दिया, उसने साफ कर दिया कि जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, जवाब मांग रही है. युवाओं के हाथों में डिग्रियां थीं, लेकिन नौकरी नहीं. किसानों के चेहरों पर मेहनत थी, लेकिन सम्मान नहीं. शिक्षामित्र, आशा बहनें, कर्मचारी, छोटे व्यापारी और गरीब परिवार सब एक ही सवाल पूछते दिखे, आखिर आम आदमी कब तक संघर्ष करता रहेगा और सत्ता में बैठे लोग सिर्फ वादे करते रहेंगे?

इस पदयात्रा में सबसे बड़ी बात यह रही कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह हर कदम पर जनता के बीच दिखाई दिए. ना सत्ता का अहंकार, ना सुरक्षा का दिखावा, ना मंच से दूर खड़े होकर राजनीति. गांव-गांव, गली-गली जाकर उन्होंने लोगों की बातें सुनीं, युवाओं का दर्द महसूस किया और भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई संसद से सड़क तक लड़ी जाएगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने जिस तरह उनका स्वागत किया, वह साफ दिखाता है कि लोग अब उन नेताओं को पसंद कर रहे हैं जो जनता के बीच खड़े दिखाई देते हैं, सिर्फ चुनाव के समय नहीं.

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इस यात्रा के दौरान हर जगह एक ही आवाज़ गूंजी- रोजगार चाहिए, सामाजिक न्याय चाहिए, पेपर लीक बंद होने चाहिए, भर्ती घोटालों का हिसाब चाहिए. युवा अब टूट चुका है, लेकिन झुका नहीं है. जिन युवाओं ने सालों मेहनत करके परीक्षाएं पास कीं, उनके सपनों को बार-बार पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने कुचला. यही वजह है कि इस पदयात्रा में सबसे ज्यादा ऊर्जा युवाओं की दिखाई दी. उनके चेहरे पर गुस्सा भी था और उम्मीद भी. उन्हें लग रहा था कि कोई तो है जो उनकी लड़ाई को अपनी लड़ाई बना रहा है.

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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब में जो मॉडल दिया, उसकी चर्चा भी इस यात्रा में हर जगह सुनाई दी. लोगों ने कहा कि अगर सरकारी स्कूल सुधर सकते हैं, अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल सकता है, बिजली-पानी में राहत मिल सकती है और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो सकती है, तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं? जनता अब तुलना कर रही है. उसे बड़े-बड़े नारों से ज्यादा जमीन पर काम दिख रहा है. यही कारण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की इस पदयात्रा ने एक नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है.

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2027 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, किसानों के सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई बनने जा रहा है. जनता अब जाति और धर्म के पुराने खेल से बाहर निकलकर अपने बच्चों के भविष्य की बात कर रही है. उसे रोजगार चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, इलाज चाहिए और ऐसा सिस्टम चाहिए जिसमें गरीब आदमी को भी सम्मान मिले.

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गाजियाबाद में आज पदयात्रा का समापन जरूर हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बदलाव की जो चिंगारी इस यात्रा ने जलाई है, वह अब तेजी से फैल रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने साफ संदेश दे दिया है कि अब राजनीति डर और झूठ से नहीं चलेगी. अब वही चलेगा जो जनता के दर्द को समझेगा, सड़क पर संघर्ष करेगा और काम करके दिखाएगा.

First published on: May 21, 2026 04:59 PM

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