Deepak Pandey
मैं 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं। दैनिक जागरण और हिंदुस्तान समेत कई संस्थानों में काम कर चुका हूं। इस वक्त न्यूज 24 डिजिटल में कार्यरत हूं।
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दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए ज्ञानपीठ सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया। संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए स्वामी रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञानपीठ सम्मान मिला। इसे लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी।
इस दौरान राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मू ने साहित्य और समाज सेवा दोनों क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए रामभद्राचार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य ने श्रेष्ठता के प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। आप अनेक प्रतिभाओं से सम्पन्न हैं तथा आपके योगदान बहुआयामी हैं। आपने शारीरिक दृष्टि से बाधित होने के बावजूद अपनी अंतर्दृष्टि, बल्कि दिव्यदृष्टि से साहित्य और समाज की असाधारण सेवा की है।
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श्री रामभद्राचार्य जी ने श्रेष्ठता के प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। आप अनेक प्रतिभाओं से सम्पन्न हैं तथा आपके योगदान बहुआयामी हैं। आपने शारीरिक दृष्टि से बाधित होने के बावजूद अपनी अंतर्दृष्टि, बल्कि दिव्यदृष्टि से साहित्य और समाज की असाधारण सेवा की है। pic.twitter.com/XttRRGTFx1
— President of India (@rashtrapatibhvn) May 16, 2025
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर राष्ट्रपति द्वारा रामभद्राचार्य महाराज को ज्ञानपीठ पुरस्कार देते हुए एक वीडियो शेयर किया। साथ ही उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुल्य योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित होने पर हृदयतल से बधाई।
आज माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा व साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुल्य योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित होने पर… pic.twitter.com/bVlmjOBedH
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 16, 2025
उन्होंने स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को कहा कि आपका कालजयी रचना संसार वैश्विक साहित्य जगत के लिए अमूल्य धरोहर है। आपका सम्मान संत परंपरा, भारत की साहित्यिक विरासत एवं राष्ट्रधर्म का सम्मान है।
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