राम मंदिर दान चोरी मामला: कौन हैं वो 3 अधिकारी जो करेंगे केस की जांच, सीएम योगी के माने जाते हैं बेहद खास

यह पूरा मामला चढ़ावे की धनराशि, बैंक खातों और ऑडिट में हेराफेरी से जुड़ा है, इसलिए वित्तीय लेन-देन की बारीकियों को समझने के लिए वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार को इस विशेष टीम का हिस्सा बनाया गया है.

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अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में कथित हेराफेरी और गबन का मामला इन दिनों देश की सबसे बड़ी सुर्खियों में बना हुआ है. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर मचे हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने इस कथित घोटाले की सच्चाई को सामने लाने के लिए राज्य के तीन सबसे तेज-तर्रार और ईमानदार अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है. शासन के ये तीन सबसे विश्वसनीय और धाकड़ अफसर इस पूरे मामले की परतों को उखाड़ेंगे और पाई-पाई का हिसाब निकालेंगे.

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कौन हैं IAS विजय विश्वास पंत?


इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी की कमान 2004 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है, जो वर्तमान में लखनऊ के मंडलायुक्त हैं. उत्तराखंड के मूल निवासी विजय विश्वास पंत प्रशासनिक गलियारों में अपनी कड़क, समयबद्ध और बेदाग छवि के लिए जाने जाते हैं. साल 2008 में महोबा के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी विशिष्ट कार्यशैली से उन्होंने कानून का राज स्थापित किया था.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उन पर अटूट भरोसा है. यही कारण था कि प्रयागराज महाकुंभ के भव्य और पारदर्शी आयोजन की जिम्मेदारी उन्हें वहां का मंडलायुक्त बनाकर सौंपी गई थी. इस महाकुंभ के सफल संचालन के बाद उन्हें राजधानी लखनऊ की कमान दी गई. इस जांच में बतौर चेयरमैन वह प्रशासनिक व कानूनी पहियों को नियंत्रित करेंगे और मंदिर प्रशासन, स्थानीय प्रशासन तथा शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे.

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कौन हैं IPS किरन एस?


आपराधिक कड़ियों को जोड़ने और सुरक्षा चूक की जांच के लिए 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी किरन एस को टीम में शामिल किया गया है. केरल के तिरुवनंतपुरम के रहने वाले किरन एस को यूपी पुलिस के सबसे खोजी दिमाग वाले अफसरों में गिना जाता है. उनके पास देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई में काम करने का लंबा अनुभव है.

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित ‘इंटरपोल मेडल ऑफ एक्सिलेंस’ से भी सम्मानित किया जा चुका है. इस केस में वह मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज के फॉरेंसिक विश्लेषण, संदिग्धों के नेटवर्क और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के पुलिसिया एंगल की पड़ताल करेंगे.

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कौन हैं नीलरतन कुमार?


यह पूरा मामला चढ़ावे की धनराशि, बैंक खातों और ऑडिट में हेराफेरी से जुड़ा है, इसलिए वित्तीय लेन-देन की बारीकियों को समझने के लिए वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार को इस विशेष टीम का हिस्सा बनाया गया है. वह उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा (UPFAS) के बेहद अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने बजट प्रबंधन और यूपीपीसीएल जैसे बड़े सरकारी निगमों में महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियां संभाली हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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