यूपी में मुस्लिम मतों को लेकर सपा को सताया डर, क्या ओवैसी देंगे 'हाथ' का साथ?

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है. बिहार विधानसभा चुनाव से लेकर महाराष्ट्र के निकाय चुनाव तक औवेसी की धमक देखकर यूपी में मुस्लिम मतों में सेंधमारी का बड़ा खतरा इंडिया गठबंधन के सामने खड़ा है, जिसको लेकर अब समाजवादी पार्टी सतर्क हो गई है. पढ़ें लखनऊ से मानस श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

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2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है. बिहार विधानसभा चुनाव से लेकर महाराष्ट्र के निकाय चुनाव तक औवेसी की धमक देखकर यूपी में मुस्लिम मतों में सेंधमारी का बड़ा खतरा इंडिया गठबंधन के सामने खड़ा है, जिसको लेकर अब समाजवादी पार्टी सतर्क हो गई है.

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपने सांसदों की बैठक बुलाई थी. जिसमें मुद्दा था पार्टी की मौजूदा स्थिति का आंकलन और आने वाले एक साल की सियासी रणनीति पर चर्चा लेकिन बैठक में मुद्दा असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल कराने को लेकर छाया रहा.

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तमाम सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह से बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को औवेसी की वजह से नुकसान हुआ और जैसा प्रदर्शन महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में एआईएमआईएम का रहा उससे एक बात साफ है कि औवेसी का मुस्लिम मतदाताओं में क्रेज बढ़ रहा है और अगर यही पैटर्न यूपी में भी नजर आया तो मुस्लिम मतों में बड़ी सेंधमारी का खतरा खड़ा हो जायेगा जो सीधे तौर पर इंडिया गठबंधन को नुकसान पहुंचाएगा.

समाजवादी पार्टी के सांसदों की ये चिंता बेवजह नहीं है. यूपी में करीब 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं और यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 70 सीटे ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 30 फीसदी से ज्यादा है और यूपी की 150 से ज्यादा विधानसभा सीटे ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की वजह से हार और जीत तय होती है.

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ऐसे में समाजवादी पार्टी को इस बात का खतरा है कि अगर मुस्लिम मतों में बिखराव हुआ तो इंडिया गठबंधन को भारी नुकसान होगा और इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा, इसीलिए बैठक में ये कहा गया कि 2027 से पहले एआईएमआईएम को इंडिया गठबंधन में शामिल कराया जाना चाहिए जिससे पीडीए के एजेंडे को और मजबूत किया जा सके.

दरअसल, बिहार चुनाव से पहले ये कोशिश खुद औवेसी की तरफ से की गई थी और उन्होंने इंडिया गठबंधन से सिर्फ छह विधानसभा सीटे ही मांगी थी, लेकिन इंडिया गठबंधन ने उनकी डिमांड को सिरे से खारिज कर दिया था. नतीजा मुस्लिम मतों में बिखराव हुआ और औवैसी एनडीए की लहर में पांच सीटे जीतने में कामयाब रहे, लेकिन इंडिया गठबंधन को भारी नुकसान हुआ. ऐसे में सपा के मुस्लिम सांसदों की तरफ से भी कहा गया कि औवेसी को साथ लेना समाजवादी पार्टी के लिए बेहतर होगा. हालांकि इस मुद्दे पर सपा के सासंद कह रहे हैं कि भविष्य में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव खुद मीडिया को इसकी जानकारी देंगे.

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बदले हुए हालातों में समाजवादी पार्टी जिस हसरत भरी निगाहों से औवेसी की तरफ देख रही है उससे एआईएमआईएम भी पूरी तरह से वाकिफ है और वो समझ रही है कि यूपी में वो भले ही खुद कामयाब न हो पाए लेकिन अगर उसे बिहार की तरह नजरअंदाज किया गया तो वो सपा का बड़ा नुकसान कर सकती है. लिहाजा सपा के इन प्रयासों पर उसके भी तेवर सख्त हैं.

हालांकि औवेसी के इंडिया गठबंधन में शामिल होने या न होने से बीजेपी पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा लेकिन बीजेपी भी चाहती यही है कि औवेसी इंडिया गठबंधन का हिस्सा न बने क्योंकि मुस्लिम मतों में बिखराव का सीधा फायदा बीजेपी और इंडिया गठबंधन को ही होगा.

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इधर, कांग्रेस भी इस खतरे को समझ रही है और वो जानती है कि पीडीए के सामने कई चुनौती हैं. अगर अल्पसंख्यक मतों में औवेसी से सेंधमारी का खतरा है तो चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी का बढ़ता जनाधार और मायावती का अकेले चुनाव लड़ना उसके दलित वोट बैंक को कमजोर कर सकता है.

खुद राजनीति के जानकार भी कई बार इस सवाल को उठा रहे हैं कि अगर यूपी में औवेसी और चंद्रशेखर एक साथ आते हैं तो उसका सीधा नुकसान इंडिया गठबंधन को होगा और ये दोनों मिलकर पीडीए की हवा निकाल देंगे.

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असदुद्दीन ओवैसी 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक हर बार अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं. वो बार-बार कहते हैं कि सपा ने सिर्फ मुसलमानों को वोट बैंक समझा उन्हें हक नहीं दिया और सपा की सरकारों के दौरान भी मुसलमानों की हालत नहीं सुधरी. ऐसे में इडिया गठबंधन को इस बात का खतरा बना रहेगा कि अगर औवेसी मुसलमानों के सवाल पर इंडिया गठबंधन को घेरते रहे तो उनका भले ही कोई फायदा न हो लेकिन सपा का बड़ा नुकसान हो जायेगा.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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