‘सच सबके सामने आएगा…’, चंपत राय ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, राम मंदिर दान विवाद पर लिखी चिट्ठी
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए पेश की गई थी और अब उसका विवरण सार्वजनिक हो चुका है. इसके बावजूद उन्होंने लोगों से अपील की कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Jul 7, 2026 18:59
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Jul 7, 2026 18:59
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटियों से जुड़े कथित चोरी के मामले पर पहली बार विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. हाल ही में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय ने कहा कि उन्होंने अब तक ट्रस्ट की इच्छा का सम्मान करते हुए इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया था.
चंपत राय ने सोशल मीडिया पर शेयर की चिट्ठी
चंपत राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हिंदी में लिखा एक हस्तलिखित पत्र साझा किया. इसमें उन्होंने कहा कि 6 जून 2026 से मंदिर परिसर की दान पेटियों की गिनती के दौरान कथित चोरी की घटना को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं और इस दौरान उन पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से इसलिए परहेज किया क्योंकि ट्रस्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रही थी.
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए पेश की गई थी और अब उसका विवरण सार्वजनिक हो चुका है. इसके बावजूद उन्होंने लोगों से अपील की कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें. उनके अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही फैलाए जा रहे भ्रम, गलत सूचनाओं और आरोपों का उचित जवाब दिया जाना चाहिए.
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1991 से अयोध्या में संगठन के माध्यम से सेवा
चंपत राय ने कहा कि फिलहाल धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्य सामने आने में देर हो सकती है, लेकिन उसे छिपाया नहीं जा सकता. अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए चंपत राय ने कहा कि वह अक्टूबर 1991 से अयोध्या में संगठन के माध्यम से सेवा कर रहे हैं. करीब 45 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने जहां भी कार्य किया, वहां उनका जीवन एक खुली किताब की तरह रहा है. उन्होंने कहा कि वह सदैव सत्य के प्रति नतमस्तक रहे हैं और आगे भी रहेंगे.