उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आज जिला प्रशासन ने एक मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया. इस दौरान इलाके को सील करके भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. वहीं बुलडोजर कार्रवाई का विरोध करने निकली समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट कर दिया गया. उन्हें विरोध करने के लिए घर से निकलने ही नहीं दिया गया. बुलडोजर की कार्रवाई सहारनपुर कलेक्ट्रेट यानी जिलाधिकारी यानी DM के ऑफिस कैंपस में बनी मस्जिद पर की गई, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. पुलिस फोर्स की मौजूदगी में प्रशासन ने मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया है.

कोर्ट के आदेश पर मस्जिद को ढहाया गया

सहारनपुर प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद के निर्माण को अवैध बताया, क्योंकि मस्जिद को सरकारी जमीन पर बनाया गया था. कोर्ट के आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने अपील की थी, लेकिन अपील खारिज हो गई और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया. आदेश के अनुसार ही मस्जिद को ढहाया गया, जिसके लिए इलाके को पुलिस छावनी बनाकर सील कर दिया गया था. अतिरिक्त पुलिस बल के साथ PAC की 5 और RRF की एक कंपनी तैनात की गई. पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च तक किया गया है. इस बीच प्रशासन कर्मियों ने मस्जिद को ढहा दिया.

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कमेटी को भेजा मस्जिद ढहाने का आदेश

सहारनपुर मंडल के DIG अभिषेक सिंह ने मामले की पुष्टि की और बताया कि मस्जिद को ढहाने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई. मस्जिद को ढहाने का नोटिस मस्जिद कमेटी को भेजा गया. मस्जिद को ढहाने के कोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ मौके पर अधिकारी मौजूद रहे. मस्जिद को ढहाने से पहले अराजक तत्वों को चेतावनी दी गई थी कि अगर किसी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. बुलडोजर एक्शन के दौरान कलेक्ट्रेट कैंपस को सील करके आस-पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे.

सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किया

मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन से पहले कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके सरकारी आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया था. वह अपने समर्थकों के साथ सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं. लेकिन सुबह ही उनके घर के बाहर पुलिस बल तैनात हुआ और किसी को भी घर के अंदर नहीं जाने दिया गया, न ही किसी को घर से बाहर आने दिया गया. सांसद इकरा हसन ने कहा कि वे सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद के मामले के लेकर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं, लेकिन उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए नजरबंद कर दिया गया. जनप्रतिनिधि का अधिकारियों से मिलना अपराध हो गया है.

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