ट्रंप के टैरिफ से ठप हुआ कालीन का कारोबार! परेशान व्यापारियों ने सरकार से की ये मांग

अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने से भदोही का कालीन उद्योग गंभीर संकट में है। 17,000 करोड़ रुपये के इस उद्योग में 60% निर्यात अमेरिका जाता है, जो अब लगभग ठप हो गया है। उत्पादन बंद है, कारखानों में कर्मचारियों की छंटनी हो रही है और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Donald Trump

50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का असर कालीन व्यापार पर पड़ रहा है

अमेरिका की तरफ से भारत पर 50% टैरिफ लगाया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर अमेरिका 50 प्रतिशत टैक्स वसूलेगा। इससे भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे और व्यापारियों को नुकसान होगा। तमाम क्षेत्रों में इसका असर पड़ रहा है और कालीन कारोबारी भी इसकी जद में आ गए हैं।

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कारोबारी बोले- टैरिफ के तहत काम करना असंभव

यूपी के भदोही के कालीन कारोबारी और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) के निदेशक असलम महबूब का कहना है कि टैरिफ का बहुत गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। हमारे पास 26 अगस्त तक की समय-सीमा थी, अब कोई नया उत्पादन नहीं हो रहा है। 17,000 करोड़ रुपये के उद्योग में 60% व्यापार अमेरिका जाता है, लेकिन अब अधिकांश माल रुका हुआ है। कारखानों ने अपने कर्मचारियों को 60-70% तक कम कर दिया है। ऐसे टैरिफ के तहत काम करना असंभव है।

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‘सरकार की मदद के बिना नहीं बच सकता उद्योग’

उन्होंने कहा कि उत्पादन, कच्चे माल की खरीद और रंगाई बंद कर दी गई है। अमेरिका से हमें व्यापार का 60% मिलता था, लेकिन दुनिया का कोई भी अन्य देश ऐसा नहीं कर सकता। हमारे पास धीरे-धीरे अन्य बाजार हो सकते हैं, लेकिन अभी के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है। हम मांग करते हैं कि टैरिफ का 50% सरकार द्वारा वहन किया जाए। खरीदार और निर्यातक शेष 50% को संतुलित करेंगे। दुनिया भर में भारतीय निर्यात 17,740 करोड़ रुपये का है, जिसमें से 60% अमेरिका जाता है। विकल्प बनाने में समय लगेगा। सरकार को एक बेलआउट पैकेज प्रदान करना चाहिए, इस उद्योग को सरकार की मदद के बिना नहीं बचाया जा सकता है।

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‘सबसे ज्यादा कालीन का निर्यात अमेरिका में’

अमेरिका के 50% टैरिफ पर अखिल भारतीय कालीन निर्माण सचिव पीयूष बरनवाल का कहना है कि कपड़ा मंत्रालय के अंतर्गत कई उत्पाद बनते हैं, जिनमें परिधान और चमड़े के जूते भी शामिल हैं। कालीन के अलावा हर उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही खपत होता है, लेकिन 98-99% कालीन निर्यात किए जाते हैं और सबसे ज़्यादा 60% अमेरिका जाते हैं। अमेरिका से टैरिफ लगने के कारण, यह एक पूर्ण विराम है। हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।

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