Swati Pandey
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Udaipur Leopard Bedroom :राजस्थान के उदयपुर में 4 घंटे तक परिवार दहशत में बना रहा, चार घंटे बाद परिवार राहत की सांस ले पाया। दरअसल सायरा मार्ग पर सेमड़ बस स्टैंड के पास स्थित भृगेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी मोहन लाल नागदा के घर करीब रात 8 बजे लेपर्ड घुस आया। मोहन नागदा को अचानक घर के दरवाजे पर कुछ हलचल दिखी, लेपर्ड घर के अंदर आ रहा था, लेपर्ड को देख मोहन नागदा डर की वजह से चिल्लाने लगे। तभी बाहर से निकल रहे लोगों ने मामला जानने के लिए टॉर्च जलाई, इतने में लैपर्ड रोशनी देख और शोर सुनकर भागता हुआ, सीढियों से चढ़ता हुआ पहली मंजिल पर चला गया।
पहली मंजिल पर दो कमरें बने हुए है, एक कमरें में लैपर्ड और दूसरे कमरें में परिवार था। लगातार लेपर्ड की गुर्राहट सुनाई पड़ रही थी।इसके बाद मोहन लाल पहली मंजिल पर पहुंचे। पड़ोसी हितेश प्रजापत और संजय डांगी के साथ मिलकर उन्होंने जिस कमरे में लेपर्ड मौजूद था। उस कमरे का दरवाजा बंद कर दिया करीब एक घंटे बाद मोहन लाल ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस वन्य विभाग की टीम के साथ रात करीब मौके पर पंहुची। लेकिन, उनके पास ट्रेंकुलाइज करने की सुविधा नहीं थी। इसकी वजह से कमरे में बंद लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज करने के लिए उदयपुर की टीम को बुलाया गया। उदयपुर से उपवन संरक्षक अरुण कुमार डी के नेतृत्व में टीम गोगुंदा रवाना हुई। करीब 11 बजे टीम उनके घर पहुंची। टीम ने कमरे में बंद लेपर्ड को खिड़की से ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद लेपर्ड को जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। करीब 4 घंटे बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
मोहन लाल नागदा ने वन विभाग को बताया , कि रात 8 बजे मैं घर के गेट के पास खड़ा था, तभी मुझे अचानक घर के दरवाजे पर कुछ आहट सुनाई दी। ध्यान से देखने पर मुझे लेपर्ड दिखाई दिया। उस दौरान लेपर्ड मुझसे 5 फीट ही दूर होगा। मैं ग्राउंड फ्लोर पर बने कमरे में चिल्लाता हुआ भागा। इस दौरान लेपर्ड घर के आंगन तक पहुंच चुका था। शोर सुनकर लेपर्ड फिर से बाहर भागने लगा। घर के बाहर से निकल रहे लोगों ने मोहन लाल के चिल्लाने की आवाज सुनकर टॉर्च जलाकर मामला समझने की कोशिश की। इतने में लेपर्ड बाहर से आ रही रोशनी और शोर सुनकर फिर से घर के अंदर घुस गया। सीढ़ियां चढ़ते हुए पहली मंजिल पर चला गया।
परिवार पहले से ही पहली मंजिल पर मौजूद था, जिसकी वजह से लेपर्ड को पहली मंजिल पर जाता देख, नागदा ने डर की वजह से चिल्लाकर परिजनों को लेपर्ड के घर में घुसने की सूचना देते हुए, दरवाजा बंद करने को कहा। आनन-फानन में उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद किया। पहली मंजिल पर दो कमरें बने हुए है, एक कमरें में लैपर्ड और दूसरे कमरें में परिवार था। लगातार लेपर्ड की गुर्राहट सुनाई पड़ रही थी। इसके बाद मोहन लाल पहली मंजिल पर पहुंचे। पड़ोसी हितेश प्रजापत और संजय डांगी के साथ मिलकर उन्होंने जिस कमरे में लेपर्ड मौजूद था। उस कमरे का दरवाजा बंद कर दिया, जिसमें लेपर्ड घुसा हुआ था। मोहन लाल ने वन विभाग को बताया कि समय रहते अगर उन्होंने परिजनों को लेपर्ड के बारे में नहीं बताया होता, तो लेपर्ड उनके कमरे में भी घुस सकता था। शुक्र है, कि लेपर्ड दूसरे कमरे में गया।
पड़ोसियों की मदद से करीब एक घंटे बाद लेपर्ड को कमरे में बंद करने के बाद मोहन लाल ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने वन विभाग की टीम को लेपर्ड के घर में होने के बारे में बताया। रात करीब 10 बजे राजसमंद के कुम्भलगढ़ वन्य जीव अभयारण्य की टीम मौके पर पहुंची। उनके पास ट्रेंकुलाइज करने की सुविधा नही होने की वजह से ट्रेंकुलाइज करने के लिए उदयपुर की टीम को बुलाया गया। उदयपुर से उपवन संरक्षक अरुण कुमार डी के नेतृत्व में टीम गोगुंदा रवाना हुई।टीम करीब 11 बजे पहुंची। टीम ने कमरे में बंद लेपर्ड को खिड़की से ट्रेंकुलाइज किया। फिर लेपर्ड को जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। परिवार ने करीब 4 घंटे बाद राहत की सांस ली।
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