Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

राजस्थान

हाई कोर्ट ने DIG से पूछा- भ्रष्टाचारियों को क्यों बचा रहे हो? दो हफ्ते में कार्रवाई का दिया आदेश

Rajasthan High Court ने आईटी विभाग में कथित हजारों करोड़ के घोटाले मामले में एसीबी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए डीआईजी से पूछा कि आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. अदालत ने दो सप्ताह में प्रभावी कदम उठाकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है. KJ Srivatsan की रिपोर्ट

Author
Written By: kj.srivatsan Updated: Feb 23, 2026 20:24

राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग में कथित हजारों करोड़ रुपये के घोटालों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा से साफ शब्दों में पूछा कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है और क्या भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाया जा रहा है.

मामले की सुनवाई न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की एकलपीठ में हुई. कोर्ट के समक्ष एसीबी के उपमहानिरीक्षक आनंद शर्मा पेश हुए और जांच के लिए समय की मांग की. इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि पहले भी पर्याप्त समय दिया जा चुका है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई. कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है.

---विज्ञापन---

याचिकाकर्ता डॉ. टी.एन. शर्मा की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने अदालत को बताया कि 6 सितंबर 2024 को टेंडरों की जांच के आदेश दिए जाने के बाद परिवादी ने 27 शिकायतें दस्तावेजों सहित एसीबी को सौंपी थीं. इनमें आरटीआई के माध्यम से जुटाए गए दस्तावेज भी शामिल हैं. इसके बावजूद किसी भी मामले में प्रभावी जांच शुरू नहीं की गई. केवल एक प्रकरण में चार महीने पहले एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें भी हाल ही में शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए गए हैं.

अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि एसीबी छोटे कर्मचारियों जैसे क्लर्क, पटवारी, चपरासी या कांस्टेबल के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े अधिकारियों पर हाथ डालने से बचती है. एक मामले में तो कथित रूप से व्हाइटनर लगाकर दस्तावेजों में फेरबदल कर कार्यादेश बढ़ाए जाने का आरोप है, लेकिन उस पर भी न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही गिरफ्तारी.

---विज्ञापन---

जब अदालत ने डीआईजी से पूछा कि क्या शिकायतों में अपराध बनता है और क्या आरोपियों के खिलाफ कोई जांच हुई है, तो उन्होंने कहा कि फोन पर बातचीत की गई है और जांच में समय लगेगा. इस जवाब पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उच्च स्तर पर कार्रवाई की मंशा नहीं है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए एसीबी को निर्देश दिया है कि 9 मार्च तक प्रभावी कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. दो सप्ताह के भीतर ठोस कदम उठाने के आदेश के साथ यह मामला अब अगली सुनवाई तक एसीबी की कार्रवाई पर टिका हुआ

First published on: Feb 23, 2026 08:10 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.