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राजस्थान के चुरू में भारतीय वायुसेना का जगुआर फाइटर जेट विमान हादसे का शिकार हो गया। इस हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद के एक बार फिर एयरफोर्स के फाइटर जेट पर सवाल खड़े हो गए हैं। सेना के अधिकारियों ने इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।
दरअसल, जगुआर फाइटर जेट को पिछले करीब 44 साल से सेना द्वारा उपयोग किया जा रहा है। बताया जाता है कि इस लड़ाकू जेट को साल 1970 में ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर बनाया था। भारतीय वायुसेना ने इस जेट का इस्तेमाल 1970 से कर रही है। सेना के मुताबिक, लड़ाकू जेट जमीन पर हमला करने और हवाई हमला करने में सक्षम है। इसके अलावा यह जेट हवाई को भी नष्ट कर देता है।
🚨 राजस्थान में बड़ा विमान हादसा
📍 चूरू के रतनगढ़ में फाइटर जेट क्रैश
✈️सूत्रों के मुताबिक IAF का फाइटर प्लेन जगुआर क्रैश pic.twitter.com/wePqr8Xs3B— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) July 9, 2025
बताया जाता है कि जगुआर फाइटर जेट को वर्तमान में केवल भारतीय वायु सेना ही इसका इस्तेमाल कर रही है। ब्रिटेन की रॉयल एयर फ़ोर्स ने 2007 तक जगुआर को हटा दिया था और उसकी जगह दूसरे विमानों ने ले ली थी। फ़्रांसीसी वायु सेना ने भी 2005 तक जगुआर का इस्तेमाल किया। ओमान वायु सेना ने वर्ष 2014 में जगुआर को सेवा से हटा दिया। सूत्रों से पता चला है कि जेट तकनीकी खराबी के चलते यह हादसा हुआ है।
भारतीय वायु सेना के पास 160 जगुआर फाइटज जेट हैं। इनमें से करीब 30 प्रशिक्षण के लिए हैं। इसका मुख्य काम जमीनी हमले करना है। भारत में इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ जेट को सिर्फ एक पायलट उड़ा सकता है जबकि कुछ में दो पायलट भी बैठ सकते हैं। भारत समय-समय पर इन फाइटर जेटों की मरम्मत भी कराता रहता है।
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