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Rajasthan News: राजस्थान में भले ही अभी कोई बड़ा चुनाव नहीं हैं लेकिन गायों और गौशालाओ का मुद्दा पूरी तरह गरमाया हुआ है। अब जब गाय का नाम आया है, तो विवाद भी साथ आया है और विवाद के केंद्र में हैं वही शख्स, जो पहले गाय के नाम पर राजनीति करते थे। अब गौशालाओं से दूरी बनाने का उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की जो अब कह रहे हैं कि वो गौशालाओं के खिलाफ हैं यानी गाय के नाम पर अब भी खेल जारी है, बस चेहरे और शब्द बदल गए हैं।
वीडियो आप देख रहे हैं इसमें बीच में खड़े हैं राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर। दो मंत्री साथ में खड़े हैं, लेकिन चर्चा में अकेले दिलावर साहब हैं क्योंकि उन्होंने कह दिया कि वो गौशालाओं के पक्ष में नहीं हैं। वो भी तब, जब मंत्री अविनाश गहलोत गायों की सेवा की तारीफ कर रहे थे। लेकिन दिलावर साहब का चेहरा बताने लगा कि वो इस ‘सेवा’ से कितने असहज हैं। और फिर, जुबान भी चल पड़ी।
गौमाता का अपमान, कब तक सहेगा राजस्थान?
गौमाता के नाम पर वोट, असलियत में गौशालाओं के विरोध में भाजपा, यही है भाजपाइयों का असली चेहरा।गौसेवा की आड़ में राजनीति करने वाली भाजपा की असलियत अब खुद उनके राजस्थान सरकार के तीन मंत्री ( श्री मदन दिलावर, श्री अविनाश गहलोत और श्री ओटाराम… pic.twitter.com/SzPAXpxCo2
— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) June 17, 2025
अब तक जो लोग ‘गौ माता की सेवा’ को राष्ट्र धर्म मानते थे, उनके मुंह से ‘गौशालाओं के खिलाफ’ जैसे शब्द आ जाएं तो सवाल उठते हैं। सवाल इसलिये भी क्योंकि दिलावर वही नेता हैं, जो अक्सर गाय को लेकर सड़कों पर उतरते थे और अब कैमरे के सामने कह रहे हैं कि ‘मैं पक्ष में नहीं हूं’। यानी गाय के नाम पर जो सियासत होती रही है, वो अब खुद अपने ही नेताओं के बयानों से कटघरे में है।
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कांग्रेस ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने वीडियो शेयर किया और लिखा गौ माता का अपमान, कब तक सहेगा राजस्थान? कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि गौसेवा का जो झूठा चोला भाजपा ने पहन रखा था, वो अब उतर चुका है और दिलावर ही नहीं, खुद भाजपा के तीन मंत्री अब इस चोले को सार्वजनिक रूप से फाड़ते नजर आ रहे हैं। गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री तो कांग्रेस राज्य में गौशालाओं के लिए किए गए प्रयासों की मानो लिस्ट लेकर खड़े थे।
कांग्रेस के पास आंकड़े भी हैं। दावा है कि अशोक गहलोत सरकार ने 1500 पंचायतों में गौशालाओं के लिए आश्रय स्थल बनवाए। कुल मिला कर 1377 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। कांग्रेस कह रही है — जब भाजपा विपक्ष में थी तो गौशालाओं की दुहाई देती थी, अब सरकार में है तो उन्हें ही गैरजरूरी बता रही है। तो फिर सच क्या है? आस्था या राजनीति? ऐसे में जब बवाल बढ़ा तो मंत्रीजी को याद आ गई श्रद्धा। अब कह रहे हैं कि बयान को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया। वे कभी गौमाता के अपमान का सोच भी नहीं सकते। लेकिन मंत्रीजी ये नहीं बता पाए कि अगर वीडियो गलत है, तो उनकी ज़ुबान और उनका हाव-भाव क्यों उस वक्त इतने साफ थे?
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