Rajasthan Police: राजस्थान के पुलिस विभाग से एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। दरअसल, राजस्थान की पुलिस अब ‘इंसाफ’ नहीं ‘न्याय’ करेगी, ‘मुजरिम’ को नहीं ‘अपराधी’ की पकड़ेगी। इसके अलावा, अब पुलिस शायद FIR की जगह ‘प्राथमिकी’ दर्ज कर सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने पुलिस विभाग के लिए एक नया फरमान जारी किया है। इस फरमान में राजस्थान पुलिस की जुबान (भाषा) बदलने का आदेश है। अब राजस्थान पुलिस में दशकों से कामकाज में इस्तेमाल हो रहे सभी उर्दू और फारसी शब्दों को ‘हिंदी’ के शब्दों से बदला जाएगा।
बदले राजस्थान पुलिस की जुबान
राज्य के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने राजस्थान पुलिस के डीजीपी से लेकर तमाम पुलिस महानिरीक्षकों को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने कानूनी कार्रवाई में इस्तेमाल होने वाले उर्दू और फारसी शब्दों को हिंदी शब्दों से बदलने का कहा है। साथ ही इस चिट्ठी में उन्होंने दलील दी कि पुलिसकर्मियों को उर्दू-फारसी समझ नहीं आती, जिससे ‘अर्थ का अनर्थ’ हो जाता है।
राज्य सरकार के मंत्री के इस फरमान को भाजपा भी आम जनता के लिए जरूरी मान रही है। इसको लेकर भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि यह एक सराहनीय कदम है। इससे जनता सरल भाषा में कानून को समझ पाएगी।
मंत्री के फरमान पर विपक्ष का हमला
वहीं पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने कहा कि यह सीधा-सीधा कानून का मजाक है। इस तरह की भाषा नीति संसद और विधानसभा से आती है, मंत्री अपने मन से यह कैसे बदल सकते हैं? उन्होंने कहा कि जरा सोचिए… क्या भाषा बदलने से व्यवस्था बदल जाएगी? क्या न्याय की स्पीड बढ़ जाएगी?