'रेपिस्ट और लुटेरा था अकबर, मीना बाजार से...', राजस्थान विधानसभा में बोले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

Rajasthan News: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को विधानसभा में मुगल बादशाह अकबर को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अकबर मीना बाजार लगवाता था। दिलावर शिक्षा विभाग के अनुदान को लेकर चर्चा कर रहे थे। विस्तार से उनके बयान के बारे में जानते हैं।

Madan Dilawar

Jaipur News: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को मुगल बादशाह अकबर पर टिप्पणी की। उन्होंने अकबर को रेपिस्ट, लुटेरा और आक्रमणकारी करार दिया। दिलावर विधानसभा में शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि पिछली सरकारों ने महापुरुषों के बारे में बच्चों को क्या-क्या पढ़ाया? उन्होंने कहीं न कहीं महाराणा प्रताप के शौर्य और वीरता को भी छोटा करने की कोशिश की। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मदन दिलावर ने कहा कि अकबर ‘मीना बाजार’ लगवाता था। वह एक दुष्कर्मी, लुटेरा और आक्रमणकारी था, जिसे महान कहा गया है। यह भारत और उसके महापुरुषों का अपमान था, जिसे वे कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकते।

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हालांकि उनके बयान पर कुछ विधायकों ने आपत्ति भी जाहिर की। उन्होंने शिक्षा मंत्री से पूछा कि अकबर के साथ आपका क्या रिलेशन है? मदन दिलावर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने हिंदुओं पर जुल्म किए, अनगिनत को मारा। औरंगजेब ने सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त किया, हिंदुओं के ऊपर जजिया कर लगाया। इस बात को देश के छात्र-छात्राओं से छिपाया गया। कई साल तक इसको पाठ्य पुस्तकों में सिलेबस के तौर पर भी शामिल किया गया। तैमूर को भी महान बताया गया है, जबकि वह आक्रमणकारी और क्रूर शासक था। यह बिल्कुल सही नहीं था।

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पहले भी कर चुके अकबर पर टिप्पणी

मदन दिलावर पहले भी मुगल बादशाह अकबर पर टिप्पणी कर चुके हैं। पिछले साल भी उन्होंने अकबर को दुष्कर्मी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि अकबर रेपिस्ट था, देश में उसका नाम लेना भी पाप है। हम लोगों को स्कूल में पढ़ाया गया था कि वह महान था, लेकिन उन्होंने सुना है कि वह मीना बाजार लगवाता था। वहां से सुंदर औरतों को उठाकर ले जाता था। ऐसे दुष्कर्मियों को किताबों में पढ़ाए जाने की जरूरत नहीं है।

कमेटी बनाने की बात कही थी

मदन दिलावर कहा था कि दुष्कर्मी कभी महान नहीं हो सकता है। ऐसे किताबें जिन लोगों ने लिखी हैं, उनकी मानसिकता गुलामों की रही होगी। उन लोगों ने तभी ऐसे शासकों के बारे में पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया। मंत्री ने कहा था कि वे कमेटी बनाकर इस मामले की जांच करवाएंगे। कमेटी बताएगी कि कैसे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पढ़ाया जा रहा है?

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