Parmod chaudhary
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केजे श्रीवत्सन, जयपुर
Rajasthan Lok Sabha Election Result 2024: इस बार लोकसभा चुनाव में राजस्थान में इंडिया गठबंधन ने जोरदार वापसी की है। गठबंधन ने बीजेपी से एक साथ 11 सीटें झटकी हैं। अब गठबंधन के सहयोगी दलों के बयान कांग्रेस की परेशानी बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। यहां बात कांग्रेस संग मिलकर चुनाव लड़ने वाले आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और भारतीय आदिवासी पार्टी के राजकुमार रौत के बयान की हो रही है। हनुमान बेनीवाल को अपने तीखे बयानों के लिए मुखर माना जाता है। जब वे एनडीए में थे, तब किसान आंदोलन, वसुंधरा राजे की कार्यशैली आदि को लेकर बयान देते थे। जिससे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती थी।
इस बार बेनीवाल ने एनडीए छोड़कर इंडिया गठबंधन से नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ा। लेकिन नतीजों के तीन दिन बाद ही ऐसा बयान जारी किया है, जिससे इंडिया ब्लॉक को परेशानी हो सकती है। दिल्ली में इंडिया गठबंधन के साथियों की बैठक हुई थी। लेकिन हनुमान बेनीवाल वहां नहीं गए। जब उनसे पूछा गया, तो बोले कि गठबंधन के नेताओं ने उन्हें बुलाया ही नहीं। वे कहां जाते? कांग्रेस नेताओं ने मुझे अपमानित किया, लेकिन मेरी लड़ाई जारी रहेगी।
आज नागौर में मीडिया के साथ साझा वक्तव्य ! pic.twitter.com/uJDQu6LMQ4
— HANUMAN BENIWAL (@hanumanbeniwal) June 7, 2024
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जब उनसे पूछा गया कि आप 1 सांसद वाले छोटे दल हैं, हो सकता है कि इसलिए नहीं बुलाया? जवाब में हनुमान बेनीवाल ने कहा कि यह सही है कि उन्हें 3 लाख वोट कांग्रेस गठबंधन के कारण मिले हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी पार्टी आरएलपी के कारण ही कांग्रेस को 20 लाख से भी ज्यादा वोटों का कई संसदीय क्षेत्रों में फायदा हुआ है। और असल जीत की वजह यही है। यदि कांग्रेस के नेता रोड़े नहीं अटकाते, तो राजस्थान में गठबंधन को और भी ज्यादा सीटें मिल सकती थीं। राजस्थान में कांग्रेस और दूसरे दलों को भी बेनीवाल की हाजिर जवाबी का पता है। माना जा रहा है कि उनके बयान पर अगर कांग्रेस ने रिएक्ट किया, तो बेनीवाल फिर पलटवार करेंगे।
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वहीं, भारतीय आदिवासी पार्टी के सुप्रीमो राजकुमार रौत के हर बयान में डूंगरपुर और बांसवाड़ा के भील बेल्ट का जिक्र है। उनकी पार्टी ने आदिवासियों से राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के इलाकों को मिलाते हुए अलग भील प्रदेश बनाने का झंडा उठा रखा है। जिसके पक्ष में कांग्रेस नहीं दिखती। इस बार कांग्रेस ने रौत के साथ चुनाव मिलकर नहीं लड़ा। लेकिन कांग्रेस डूंगरपुर में रौत की जीत नहीं रोक सकी। वहीं, दूसरी सीटों उदयपुर मवाद आदि पर रौत के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ। भाजपा यहां से जीत गई। अब नतीजों के बाद फिर से बेनीवाल और रौत के बयान आने लगे हैं। जो कांग्रेस के लिए किसी भी सूरत में सही नहीं है। क्या कांग्रेस इन नेताओं को लेकर कोई रिएक्ट करेगी? यह देखने वाली बात होगी।
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