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राजस्थान बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत ने डूंगरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में नशे के बढ़ते चलन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने गांवों में शिक्षा की कमी और गुटके के बढ़ते प्रसार के बीच सीधा संबंध बताया है। उन्होंने कहा कि जहां शिक्षा नहीं पहुंच रही है, वहां नशा पहुंच गया है। सांसद रोत ने खुद गांव की कुछ दुकानों का दौरा किया। वहां से गुटखे की बिक्री का आंकड़ा बताया।
सांसद के मुताबिक, एक दुकान पर औसतन 8 पैकेट विमल बिक रहे हैं। एक पैकेट में 30 पाउच होते हैं। यानी 240 पाउच प्रतिदिन और एक पाउच की कीमत 5 रुपये होने से 1200 रुपये प्रतिदिन की बिक्री सिर्फ विमल की हो रही है। डूंगरपुर जिले में 353 ग्राम पंचायतें हैं और हर पंचायत में औसतन 25 दुकानें हैं। इसका मतलब है कि जिले भर में 8825 करीब दुकानें मौजूद हैं। सांसद के मुताबिक, इन सभी दुकानों पर डेली बिकने वाली विमल की कुल कीमत लगभग 1.05 रुपये करोड़ बैठती है।
इस रफ्तार से अगर गिनती की जाए, तो डूंगरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में सिर्फ विमल पर ही हर महीने लगभग 30 करोड़ और सालभर में 360 करोड़ खर्च हो रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ विमल तक सीमित हैं। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, दारू और अन्य नशीले उत्पादों का आंकड़ा तो इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।
सांसद राजकुमार रोत ने अपनी सोशल पोस्ट में इस पूरे अनुभव और गणना को साझा करते हुए लिखा कि मैंने ये हिसाब क्यों किया? ये पोस्ट क्यों लिखी? ये आप जरा सोचिए। उम्मीद है आप इसे गंभीरता से पढ़ेंगे, विचार करेंगे और खुद, अपने परिवार और समाज को इस खतरनाक आदत से बचाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने उलगुलान जोहार के नारे के साथ अपनी बात खत्म की। युवाओं से अपील की है कि वे शिक्षा और स्वावलंबन की राह चुनें, न कि नशे की राह को चुनकर अपनी जिंदगी बर्बाद करें।
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