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राजस्थान

जयपुर में अवैध मंदिरों पर हाईकोर्ट सख्त, 7 दिन में हटाने का दिया आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में फुटपाथ, सड़क और आम रास्तों पर बने अवैध मंदिरों को हटाने का आदेश दिया है. सरकार को मूर्तियां पास के वैध मंदिरों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी.

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Edited By : Bhawna Dubey Updated: Jan 29, 2026 11:12

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़क और आम रास्ते पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने का आदेश दिया हैं. जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश सनी मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.

अदालत ने नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिए कि वह अगली सुनवाई पर कोर्ट में शपथपत्र पेश करके बताए कि उन्होने शहर में फुटपाथ और अन्य स्थानों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए.

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वहीं हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह अवैध रूप से बने मंदिरों के भवन को धवस्त करने और उनकी मूर्तियों को पास के वैध मंदिरों में शिफ्ट करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करें. अदालत 4 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी.

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प्रताप नगर में बने अवैध मंदिर को 7 दिन में हटाने के निर्देश

दरअसल, प्रताप नगर सेक्टर-7 में आम रास्ते पर बनी दुकानों और मंदिर को लेकर सनी मीणा ने एक जनहित याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि कुछ लोगों ने आम रास्ते पर अतिक्रमण करके दुकानों और मंदिर का निर्माण कर लिया हैं.

यह लोग मंदिर की आड़ में दुकानें संचालित कर रहे हैं. अदालत में जनहित याचिका लगने के बाद नगर-निगम ने दुकानों को तोड़ दिया. लेकिन मंदिर हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की.

नगर निगम और अन्य पक्षकारों की ओर से कहा गया कि मंदिर पुराना है और लोगों की आस्था से जुड़ा हैं. इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने मंदिर निर्माण की ताजा तस्वीरें पेश की. जिसके बाद कोर्ट निगम के डिप्टी कमिश्नर को 7 दिन में मंदिर हटाने और मूर्ति को अन्य मंदिर में शिफ्ट करने के आदेश दिए.

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अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

मामले में हाउसिंग बोर्ड के अधिवक्ता अजय शुक्ला ने अदालत को बताया कि प्रताप नगर को नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया हैं. ऐसे में यहां निर्माण की अनुमति, अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की हैं.

अदालत ने कहा कि यहां स्पष्ट है कि इस मंदिर का निर्माण बिना अनुमति के किया गया हैं. ऐसे में इस निर्माण के लिए संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए जाने के पात्र हैं. इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाए.

First published on: Jan 29, 2026 11:12 AM

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