मुंबई में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर डिजिटल दुनिया के खतरनाक पहलू को उजागर कर दिया है. मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक संगठित सेक्सटॉर्शन रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में जम्मू-कश्मीर टी-20 लीग से जुड़ी एक महिला क्रिकेटर भी शामिल है.
सोशल मीडिया से शुरू हुआ जाल
पुलिस जांच के अनुसार, कोलाबा के 28 वर्षीय कारोबारी की मुलाकात साल 2024 में सोशल मीडिया के जरिए Farkhanda Aziz Khan से हुई. शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन धीरे-धीरे यह निजी और आपत्तिजनक चैट में बदल गई. इसी भरोसे और नजदीकी का फायदा उठाकर आरोपी ने अपने जाल को मजबूत किया.
निजी चैट को बनाया हथियार
जैसे ही बातचीत निजी स्तर तक पहुंची, आरोपी महिला ने कारोबारी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. चैट्स और स्क्रीनशॉट वायरल करने की धमकी दी गई, साथ ही झूठे केस में फंसाने और जेल भेजने की बात कहकर उसे मानसिक दबाव में रखा गया. डर और बदनामी के भय में फंसे पीड़ित ने चुपचाप पैसे देने शुरू कर दिए.
उगाही का सुनियोजित खेल
जांच में सामने आया कि अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 के बीच पीड़ित से 32 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 23.61 लाख रुपये वसूले गए. लेकिन यहीं मामला नहीं रुका—जनवरी 2026 में धमकियों का दबाव बढ़ाते हुए आरोपियों ने करीब 40 लाख रुपये और ऐंठ लिए. इस तरह कुल उगाही 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई.
गिरोह का नेटवर्क और भूमिका
इस पूरे रैकेट में फरखंदा के भाई Bazil Aziz Khan और उनके सहयोगी Uddin Imtiyaz Wani की सक्रिय भूमिका सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, वसूली गई रकम का बड़ा हिस्सा वानी के बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया, जबकि कुछ पैसे अन्य खातों में बांटे गए. इससे यह साफ होता है कि यह कोई अकेले का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का काम था.
तकनीकी जांच से खुला राज
मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच करते हुए इस गिरोह तक पहुंच बनाई. कार्रवाई के दौरान फरखंदा और उसके भाई को नई दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार किया गया, जबकि तीसरे आरोपी को श्रीनगर से पकड़ा गया.
कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और ऐसे ही मामलों में फंसे अन्य पीड़ितों की भी तलाश कर रही है.
सतर्क रहने की जरूरत
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर की गई एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सतर्क रहें और किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग या संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें.
मुंबई में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर डिजिटल दुनिया के खतरनाक पहलू को उजागर कर दिया है. मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक संगठित सेक्सटॉर्शन रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में जम्मू-कश्मीर टी-20 लीग से जुड़ी एक महिला क्रिकेटर भी शामिल है.
सोशल मीडिया से शुरू हुआ जाल
पुलिस जांच के अनुसार, कोलाबा के 28 वर्षीय कारोबारी की मुलाकात साल 2024 में सोशल मीडिया के जरिए Farkhanda Aziz Khan से हुई. शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, लेकिन धीरे-धीरे यह निजी और आपत्तिजनक चैट में बदल गई. इसी भरोसे और नजदीकी का फायदा उठाकर आरोपी ने अपने जाल को मजबूत किया.
निजी चैट को बनाया हथियार
जैसे ही बातचीत निजी स्तर तक पहुंची, आरोपी महिला ने कारोबारी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. चैट्स और स्क्रीनशॉट वायरल करने की धमकी दी गई, साथ ही झूठे केस में फंसाने और जेल भेजने की बात कहकर उसे मानसिक दबाव में रखा गया. डर और बदनामी के भय में फंसे पीड़ित ने चुपचाप पैसे देने शुरू कर दिए.
उगाही का सुनियोजित खेल
जांच में सामने आया कि अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 के बीच पीड़ित से 32 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 23.61 लाख रुपये वसूले गए. लेकिन यहीं मामला नहीं रुका—जनवरी 2026 में धमकियों का दबाव बढ़ाते हुए आरोपियों ने करीब 40 लाख रुपये और ऐंठ लिए. इस तरह कुल उगाही 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई.
गिरोह का नेटवर्क और भूमिका
इस पूरे रैकेट में फरखंदा के भाई Bazil Aziz Khan और उनके सहयोगी Uddin Imtiyaz Wani की सक्रिय भूमिका सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, वसूली गई रकम का बड़ा हिस्सा वानी के बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया, जबकि कुछ पैसे अन्य खातों में बांटे गए. इससे यह साफ होता है कि यह कोई अकेले का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का काम था.
तकनीकी जांच से खुला राज
मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच करते हुए इस गिरोह तक पहुंच बनाई. कार्रवाई के दौरान फरखंदा और उसके भाई को नई दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार किया गया, जबकि तीसरे आरोपी को श्रीनगर से पकड़ा गया.
कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और ऐसे ही मामलों में फंसे अन्य पीड़ितों की भी तलाश कर रही है.
सतर्क रहने की जरूरत
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर की गई एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सतर्क रहें और किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग या संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें.