केतन अग्रवाल मर्डर केस में हर दिन नए मोड़ आ रहे हैं. जहां एक ओर पुलिस इसे सुनियोजित हत्या मानकर जांच कर रही है, वहीं आरोपी सिया गोयल के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने एक बड़ा दावा करते हुए केस की दिशा पर सवाल खड़े किए हैं. वकील का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई 'स्वतंत्र गवाह' सामने नहीं आया है, जिसने सिया को यह अपराध करते हुए अपनी आंखों से देखा हो.
वकील का तर्क: 'कोई स्वतंत्र गवाह नहीं'
मीडिया से बातचीत में वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा, 'यह पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है और पुलिस अपनी प्रक्रिया का पालन कर रही है. शुरुआत में इसे दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने इसमें हत्या का एंगल जोड़ा.'
उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी तक कोई चार्जशीट फाइल नहीं हुई है, जिससे मामले में स्पष्टता मिल सके. वकील ने दलील दी, 'मेरा मानना है कि इस अपराध को साबित करने के लिए ऐसा कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है जिसने मेरी क्लाइंट को इस तरह का जुर्म करते देखा हो.'
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29 जून को होगी अहम सुनवाई
वकील ने बताया कि सिया गोयल जांच में पुलिस का पूरा सहयोग कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले, और साथ ही आरोपी के परिवार को भी.'
29 जून को होने वाली अगली सुनवाई के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सिया के लिए न्यायिक हिरासत की मांग की जाएगी. अगर पुलिस फिर से रिमांड की मांग करती है, तो उन्हें इसके लिए ठोस आधार पेश करने होंगे. उन्होंने कहा कि कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही न्याय के हित में अपना निर्णय सुनाएगा.
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पुलिस की जांच पर टिकी हैं निगाहें
हालांकि, वकील का दावा अपनी जगह है, लेकिन पुलिस के पास इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सबूत और अन्य तकनीकी साक्ष्य होने का दावा है. पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान इसे महज एक हादसा माना था, लेकिन सिया के बदलते बयानों और डिजिटल ट्रेल मिलने के बाद इसे हत्या के मामले में तब्दील कर दिया गया.
केतन अग्रवाल मर्डर केस में हर दिन नए मोड़ आ रहे हैं. जहां एक ओर पुलिस इसे सुनियोजित हत्या मानकर जांच कर रही है, वहीं आरोपी सिया गोयल के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने एक बड़ा दावा करते हुए केस की दिशा पर सवाल खड़े किए हैं. वकील का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई ‘स्वतंत्र गवाह’ सामने नहीं आया है, जिसने सिया को यह अपराध करते हुए अपनी आंखों से देखा हो.
वकील का तर्क: ‘कोई स्वतंत्र गवाह नहीं’
मीडिया से बातचीत में वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है और पुलिस अपनी प्रक्रिया का पालन कर रही है. शुरुआत में इसे दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने इसमें हत्या का एंगल जोड़ा.’
उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी तक कोई चार्जशीट फाइल नहीं हुई है, जिससे मामले में स्पष्टता मिल सके. वकील ने दलील दी, ‘मेरा मानना है कि इस अपराध को साबित करने के लिए ऐसा कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है जिसने मेरी क्लाइंट को इस तरह का जुर्म करते देखा हो.’
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29 जून को होगी अहम सुनवाई
वकील ने बताया कि सिया गोयल जांच में पुलिस का पूरा सहयोग कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले, और साथ ही आरोपी के परिवार को भी.’
29 जून को होने वाली अगली सुनवाई के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सिया के लिए न्यायिक हिरासत की मांग की जाएगी. अगर पुलिस फिर से रिमांड की मांग करती है, तो उन्हें इसके लिए ठोस आधार पेश करने होंगे. उन्होंने कहा कि कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही न्याय के हित में अपना निर्णय सुनाएगा.
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पुलिस की जांच पर टिकी हैं निगाहें
हालांकि, वकील का दावा अपनी जगह है, लेकिन पुलिस के पास इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सबूत और अन्य तकनीकी साक्ष्य होने का दावा है. पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान इसे महज एक हादसा माना था, लेकिन सिया के बदलते बयानों और डिजिटल ट्रेल मिलने के बाद इसे हत्या के मामले में तब्दील कर दिया गया.