भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया. 6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई भाजपा ने आज अपने सफर के 46 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस ऐतिहासिक मौके पर महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पार्टी की विकास यात्रा और अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि पर विस्तार से प्रकाश डाला है.
कार्यकर्ता से अध्यक्ष तक का सफर
रविंद्र चव्हाण ने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालना केवल भाजपा जैसे लोकतांत्रिक संगठन में ही संभव है. उन्होंने पार्टी को एक विशाल वटवृक्ष बताते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक कार्यकर्ताओं के परिश्रम ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बनाया है. चव्हाण ने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने भाजयुमो उपाध्यक्ष, नगरसेवक, विधायक और कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया और आज नेतृत्व की भूमिका में हैं.
विचारधारेच्या घट्ट मुळांनी मातीत रुजलेल्या आणि कार्यकर्त्यांच्या संघर्षातून उभा राहिलेल्या भारतीय जनता पार्टीच्या वटवृक्षाला आज ४६ वर्षे पूर्ण होत आहेत. त्यानिमित्त महाराष्ट्र भाजपाच्या गौरवशाली वाटचालीचा घेतलेला हा विशेष मागोवा!#47YearsOfNationFirst… pic.twitter.com/mMhXKKKrpw
— Ravindra Chavan (@RaviDadaChavan) April 6, 2026
विरोधियों को करारा जवाब
भाजपा पर अक्सर लगने वाले ‘शेटजी-भटजी’ (उच्च वर्ग की पार्टी) के आरोपों पर चव्हाण ने कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि जाति आधारित राजनीति करने वालों के लिए यह एक करारा जवाब है कि पिछले 46 वर्षों में महाराष्ट्र भाजपा ने 11 प्रदेश अध्यक्ष बहुजन समाज से दिए हैं. यह पार्टी की समावेशी विचारधारा का प्रमाण है.
दिग्गजों के योगदान का जिक्र
चव्हाण ने महाराष्ट्र में संगठन की नींव रखने वाले उत्तमराव पाटील से लेकर गोपीनाथ मुंडे के संघर्षों को याद किया. उन्होंने कहा कि मुंडे जी ने पार्टी को गांव-गांव और खेत-खलिहान तक पहुंचाया. साथ ही नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, सुधीर मुनगंटीवार और चंद्रकांत पाटील जैसे नेताओं के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर ‘अंत्योदय’ के विचार को जमीन पर उतारा.
भविष्य का लक्ष्य: विकसित भारत और महाराष्ट्र
स्थापना दिवस के मौके पर चव्हाण ने भविष्य के रोडमैप पर भी बात की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है, जिसमें महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देना है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं, क्योंकि विकसित महाराष्ट्र के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है.










