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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्प शक्ति से चीता स्टेट बना एमपी

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर भोपाल में आयोजित इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस प्री-समिट कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बताते हुए वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को रेखांकित किया

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‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की संकल्प शक्ति से मध्यप्रदेश को आज चीता स्टेट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है. चीता प्रोजेक्ट विश्व में वन्यजीवों की पुनर्स्थापना का चमत्कारिक उदाहरण है. श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को दोबारा बसाना चुनौती पूर्ण था. प्रदेश के वन विभाग ने नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चीतों का नया घर तैयार किया है. राज्य सरकार ने प्रदेश की धरती पर 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों की वापसी कराई है. इससे हमारे कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता समृद्ध हुई है. सनातन संस्कृति के अनुसार हमारे वनों में सभी वन्यजीवों की उपस्थिति होनी चाहिए. इस दिशा में राज्य सरकार प्रयास कर रही है. राज्य में दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए, घड़ियाल और गिद्ध का संरक्षण किया गया है. भोपाल से छोड़े गए गिद्ध ने उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है.’ यह बात मुख्यमंत्री डॉ.

मोहन यादव ने 22 मई को इंडियान इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (IIFM) में कही. सीएम डॉ. यादव अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस(IBCA) प्री-समिट इवेंट को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के लिए 20 बाइक और एक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. कार्यक्रम में इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस की उपलब्धियों पर आधारित, मध्यप्रदेश जैवविविधता विरासत स्थलों और मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड द्वारा संरक्षित तपोवन भूमि स्थलों पर लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम में डाक विभाग के माय स्टैंप, चीता संरक्षण पर केंद्रित ब्रोशर, भारत की बायो डायवर्सिटी रिपोर्ट 2026 का विमोचन किया गया. इस दौरान एबीएस एंड टू एंड पोर्टल का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम में आईआईएफएफ की डेटा ड्रिवन लैब का सिंगल क्लिक से लोकार्पण किया गया.

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इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरीसृपों की बसाहट का कार्य भी किया जा रहा है. प्रदेश में किंग कोबरा लाने के साथ साथ गैंडा लाने की भी तैयारी है. नेशनल पार्कों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जा रहे हैं. ताकि, आवश्यकता पड़ने पर वन्य जीवों को त्वरित रूप से इलाज की सुविधा मिल सके. उन्होंने कहा कि हम मध्य प्रदेश की धरती पर सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली इतिहास देखते हैं. सम्राट विक्रमादित्य ने अपने नवरात्रों और शासन के बल बूते पर सुशासन की स्थापना की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कालखंड भी हमें इस स्वर्णिम दौर की लघु झलक दिखाता है. अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मध्य प्रदेश में मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार मानता हूं. आज का समय हमें जैव विविधता के क्षेत्र में काम करने के लिए सिंहावलोकन का अवसर प्रदान करता है.

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प्रकृति को सहेज रहा मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार कर रहा है. मध्यप्रदेश की धरती पर हाथियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है. मध्यप्रदेश घड़ियाल स्टेट भी है. चंबल और कूनो नेशनल पार्क में भी घड़ियालों के संरक्षण का कार्य तेजी से हो रहा है. मगर मां नर्मदा का वाहन है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है. प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महा अभियान प्रगति पर है. राज्य में अब तक 3000 करोड़ से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ सफाई के कार्य किए गए हैं. इस महा अभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है.

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जिसे बना नहीं सकते, उसे बिगाड़ें नहीं

कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे बिगाड़े नहीं. धरती पर उपलब्ध जैव विविधता से हमें भोजन, दवाई और जीवन मिलता है. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता में हमने एक वन्यजीव प्रजाति का संरक्षण किया है. चीता घास के मैदानों में रहने वाला वन्यजीव है. उन्होंने कहा कि हम जैव विविधता संरक्षण के कार्य में सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव रखते हैं. जैव विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है. दुनिया में कितना भी मशीनीकरण आ जाए, लेकिन प्रकृति पर हमारी निर्भरता कभी कम नहीं होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है. वर्ष 2030 तक हम इस लक्ष्य को पूर्ण करेंगे.

सदियों से भारत ने प्रकृति से साथ जीवन जीने की परंपरा को आगे बढ़ाया है. मध्यप्रदेश की जनजातियों की जीवन शैली में यह समृद्ध परंपरा साफ नजर आती हैं. हमें प्राकृतिक खेती और प्रकृति को बचाए रखने में सहयोग करना है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुनिया की भीषण त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस त्रासदी के अपशिष्ट का संपूर्ण निष्पादन कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया है. प्रदेश में चीता संरक्षण के लिए भी बहुत अच्छा कार्य हो रहा है. इसके लिए राज्य सरकार को बधाई देता हूं.

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घरों में ही बनाएं छोटा सा जैव विविधता पार्क

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण से भावी पीढ़ियों के पर्यावरण को बचाया जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन लाइफ की पहल की है, जिसे विश्वस्तर पर सराहा गया है. पर्यावरण बचाने के लिए देश में स्थानीय स्तर पर 2 लाख से अधिक जैव विविधता समितियां बनाई गई हैं. प्रोजेक्ट चीता दुनिया का पहला इंटर कॉन्टिनेंटल ट्रांसफर है. पयार्वरण की परिस्थितियों में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से घटी है. पर्यावरण बचाने के लिए आज हम अपनी बालकनी में पक्षियों के लिए घोसला रखते हैं और पौधे लगाते हैं. हमें एक छोटा जैव विविधता पार्क घरों की बालकनी में बनाना चाहिए.

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दूसरी ओर, कार्यक्रम में कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने प्रजेंटेशन दिया. इसमें उन्होंने बताया कि चीता करीब 4-5 हजार वर्ष से भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रहा है. श्योपुर के कूनो में पहली बार वर्ष 2022 में नामीबिया से चीते लाए गए थे. भारत में इस साल 18 नए चीतों का जन्म हुआ, जिनमें से 14 अभी फल-फूल रहे है. भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी भी शावकों को जन्म दे चुकी है. भारत में अब तक चीतों की संख्या कुल 53 है. इन्में से 33 भारत में जन्मे हैं.

First published on: May 22, 2026 03:54 PM

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