झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है. तमाम सियासी कयासों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है. नाथवानी की यह जीत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सत्तारूढ़ 'INDIA' ब्लॉक के लिए एक बड़े रणनीतिक झटके के रूप में देखी जा रही है.
चुनाव में मुख्य मुकाबला परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच था, जिसमें नाथवानी ने बाजी मार ली. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार वैद्यनाथ राम की जीत पहले से तय मानी जा रही थी और वे उम्मीद के मुताबिक चुनाव जीत गए हैं.
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क्रॉस वोटिंग ने पलटा पासा
निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल दो सीटों के लिए हुए इस चुनाव में जेएमएम के बैद्यनाथ राम को सर्वाधिक 30 वोट मिले. वहीं, एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी 28 वोट हासिल कर विजयी घोषित किए गए. कांग्रेस के प्रणव झा को केवल 20 वोटों से संतोष करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस मतदान के दौरान तीन वोट अमान्य घोषित किए गए, जिनमें से एक कांग्रेस और दो भाजपा के थे.
कौन हैं परिमल नाथवानी?
इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी एक बार फिर देश के सियासी और कॉरपोरेट हलकों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं. नाथवानी भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक (डायरेक्टर) हैं. उन्हें रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और वर्तमान चेयरमैन मुकेश अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता है.
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रिलायंस इंडस्ट्रीज में निभाई अहम भूमिका
रिलायंस इंडस्ट्रीज को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में नाथवानी की पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका रही है. गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी की स्थापना के समय जब भूमि अधिग्रहण को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही थीं, तब नाथवानी ने ही उन संकटों को दूर किया था. इसके अलावा, देश भर में गैस पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने, रिलायंस इन्फोकॉम के टेलीकॉम ढांचे को खड़ा करने और रिलायंस जियो के रोल-आउट में उनकी रणनीतिक सूझबूझ की अहम भूमिका रही है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, परिमल नाथवानी देश के सबसे अमीर सांसदों में शुमार हैं और उनकी कुल संपत्ति 396 करोड़ रुपये से अधिक है. रिलायंस समूह में गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश के औद्योगिक संबंधों के प्रभारी होने के साथ-साथ अब वे राजनीतिक रूप से भी देश के उच्च सदन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे.
झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है. तमाम सियासी कयासों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है. नाथवानी की यह जीत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सत्तारूढ़ ‘INDIA’ ब्लॉक के लिए एक बड़े रणनीतिक झटके के रूप में देखी जा रही है.
चुनाव में मुख्य मुकाबला परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच था, जिसमें नाथवानी ने बाजी मार ली. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार वैद्यनाथ राम की जीत पहले से तय मानी जा रही थी और वे उम्मीद के मुताबिक चुनाव जीत गए हैं.
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क्रॉस वोटिंग ने पलटा पासा
निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल दो सीटों के लिए हुए इस चुनाव में जेएमएम के बैद्यनाथ राम को सर्वाधिक 30 वोट मिले. वहीं, एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी 28 वोट हासिल कर विजयी घोषित किए गए. कांग्रेस के प्रणव झा को केवल 20 वोटों से संतोष करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस मतदान के दौरान तीन वोट अमान्य घोषित किए गए, जिनमें से एक कांग्रेस और दो भाजपा के थे.
कौन हैं परिमल नाथवानी?
इस जीत के साथ ही परिमल नाथवानी एक बार फिर देश के सियासी और कॉरपोरेट हलकों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं. नाथवानी भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक (डायरेक्टर) हैं. उन्हें रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और वर्तमान चेयरमैन मुकेश अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता है.
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रिलायंस इंडस्ट्रीज में निभाई अहम भूमिका
रिलायंस इंडस्ट्रीज को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में नाथवानी की पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका रही है. गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी की स्थापना के समय जब भूमि अधिग्रहण को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ रही थीं, तब नाथवानी ने ही उन संकटों को दूर किया था. इसके अलावा, देश भर में गैस पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने, रिलायंस इन्फोकॉम के टेलीकॉम ढांचे को खड़ा करने और रिलायंस जियो के रोल-आउट में उनकी रणनीतिक सूझबूझ की अहम भूमिका रही है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, परिमल नाथवानी देश के सबसे अमीर सांसदों में शुमार हैं और उनकी कुल संपत्ति 396 करोड़ रुपये से अधिक है. रिलायंस समूह में गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश के औद्योगिक संबंधों के प्रभारी होने के साथ-साथ अब वे राजनीतिक रूप से भी देश के उच्च सदन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे.