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झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ कैसे हुआ खेला? बहुमत के बाद भी कैसे हारी, समझें – 5 ‘जादुई’ वोटों का गणित

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए वोटिंग हुई. किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत थी.

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झारखंड विधानसभा में स्पष्ट बहुमत और दोनों राज्यसभा सीटों पर जीत का पक्का गणित होने के बावजूद सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन केवल एक सीट ही जीत सका. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम के उम्मीदवार बैजनाथ राम तो आसानी से चुनाव जीत गए, लेकिन गठबंधन की दूसरी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा.

इस चुनाव ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को ऐतिहासिक चौथी बार राज्यसभा पहुंचा दिया. लेकिन इस जीत ने गठबंधन के भीतर गहरी टूट और ‘क्रॉस वोटिंग’ के उस खेल को उजागर कर दिया है, जिसने ऐन वक्त पर कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया.

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जीत का क्या था गणित?

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए वोटिंग हुई. किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत थी. जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी और वामपंथी दलों को मिलाकर सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन था. इस लिहाज से 28-28 वोटों के दो हिस्से करके दोनों उम्मीदवारों की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही थी.

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वहीं, भाजपा और उसकी सहयोगी आजसू और जदयू को मिलाकर एनडीए के पास केवल 25 विधायक थे. यानी परिमल बैजनाथ राम को जिताने के लिए एनडीए को अपनी ताकत से अलग अतिरिक्त 3 वोटों की सख्त जरूरत थी.

जानिए किसे कितने वोट मिले?

जब मतों की गिनती हुई, तो परिणाम दावों से बिल्कुल उलट आए. बैजनाथ राम 30 वोट पाकर सबसे आगे रहे और आसानी से जीते. वहीं, NDA समर्थित परिमल नाथवानी को भी कुल 30 वोट मिले थे, जिनमें से दो को अयोग्य करार दे दिया, इस हिसाब से उन्हें 28 वोट मिले और वह भी चुनाव जीत गए. वहीं, कांग्रेस के प्रणव झा को कुल 21 वोट मिले थे, जिनमें से एक वोट अयोग्य हो गया, यानी उन्हें सिर्फ 20 वोट मिले.

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5 ‘जादुई’ वोटों का गणित

इस चुनाव की सबसे बड़ी मिस्ट्री यह रही कि 56 विधायकों के समर्थन वाले गठबंधन के उम्मीदवार प्रणव झा सिर्फ 20 वोटों पर कैसे सिमट गए? और नाथवानी को कैसे 30 वोट मिल गए, जिसमें से दो रद्द कर दिए गए. इसका सीधा मतलब है कि ‘इंडिया’ गठबंधन के खेमे से बड़े पैमाने पर सेंधमारी हुई है और कम से कम 5 से 6 विधायकों ने व्हिप के बावजूद पर्दे के पीछे से क्रॉस वोटिंग की है.

कांग्रेस को किस पर शक

झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने क्रॉस वोटिंग का आरोप राजद और माले पर लगाया है. उन्होंने कहा कि राजद-माले ने धोखा दिया है, राज्य में चल रहे गठबंधन की समीक्षा होगी और केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी जायेगी. वहीं, राजद और माले ने कांग्रेस के प्रभारी के बयान को खारिज किया है और पलटवार करते हुए कांग्रेस के विधायकों पर ही निशाना साधा है.

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झारखंड में माले के विधायक अरुप चटर्जी और चंद्रदेव महतो हैं. वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के संजय प्रसाद यादव, सुरेश पासवान, नरेश प्रसाद सिंह और संजय कुमार सिंह यादव हैं. इन्हीं विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का कांग्रेस आरोप लगा रही है.

प्रभात खबर ने माले के दोनों विधायकों के हवाले से लिखा है कि उनके दल की ओर से कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई है, हमारे विधायकों ने गठबंधन के निर्देशों के तहत ही वोटिंग की है. क्रॉस वोटिंग किसने की है, इसकी जांच होनी चाहिए.

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वहीं, रिपोर्ट में राजद के संजय प्रसाद यादव के हवाले से लिखा है कि राजद कभी किसी को धोखा नहीं देता, उसे अपनी गिरेबां में झांकना चाहिए. माले की तरह ही राजद ने भी कहा कि क्रॉस वोटिंग की चांज होनी चाहिए.

First published on: Jun 18, 2026 11:40 PM

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