मध्य प्रदेश के इंदौर को नंबर 1 क्लीन सिटी कहा जाता है. यहां सड़कें,पानी, मैदान हर चीज साफ है. लेकिन इसी स्वच्छ शहर में पानी ही लोगों की मौत की वजह बन गया. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से 1 जनवरी को एक और मौत हो गई. दूषित पानी अभी तक 18 लोगों की जान ले चुका है, जिसे लेकर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है. हाई कोर्ट ने कहा कि इस घटना से शहर की छवि खराब होगी.
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चीफ सेक्रेटरी को पेश होने का दिया आदेश
इंदौर हाई कोर्ट में भागीरथपुरा में गंदे पानी के कारण हुई मौत और बीमारियों को लेकर तकरीबन 3 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसपर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई. कोर्ट ने 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कोर्ट के सामने पेश होने के निर्देश दिए हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि वो उनसे इस बारे में सुनना चाहते हैं क्योंकि ये समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है.
गंदे पानी ने ली कई लोगों की जान
कोर्ट ने पानी से हुई मौत के मामले को काफी गंभीर बताया है. उन्होंने कहा कि इंदौर जैसे साफ सुथरे शहर में ऐसी घटना होना काफी हैरानी की बात की. आपको बता दें कि दूषित पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है. अब तक 400 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है. मौजूदा हालात में 16 मरीज ICU में भर्ती हैं जबकि 3 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है. दरअसल 31 दिसंबर 2025 को इंदौर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और नगर निगम को ये निर्देश दिया था कि लोगों को साफ पीने का पानी मिलना चाहिए.
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