दक्षिणी दिल्ली में आउटर रिंग रोड पर लगने वाले लंबे जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार अब एक दीर्घकालिक योजना पर विचार कर रही है. इसके तहत मोदी मिल फ्लाईओवर को आगे बढ़ाकर कालकाजी, नेहरू प्लेस और सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर से जोड़ने का प्लान बनाया जा रहा है. इस प्रस्ताव का मकसद आउटर रिंग रोड के उन हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ना है, जहां हर रोज भीषण जाम लगता है.
दरअसल, मोदी मिल, नेहरू प्लेस, भैरव मंदिर और सावित्री सिनेमा के आस-पास ट्रैफिक जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. ट्रैफिक विभाग ने इस स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) को सुझाव दिया है कि केवल कालकाजी फ्लाईओवर को मोदी मिल से जोड़ने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. इसके बाद फ्लाईओवर नेटवर्क का आगे तक विस्तार करने पर चर्चा शुरू हुई है.
एक महीने पहले ही शुरू हो चुका है काम
मौजूदा योजना के तहत सिंगल लेन वाले कालकाजी फ्लाईओवर की दूसरी लेन बनाने और उसे मोदी मिल तक जोड़ने का काम करीब एक महीने पहले शुरू हो चुका है. इस परियोजना पर 312.94 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसके अलावा 435 मीटर लंबे सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर की दूसरी लेन भी बनाई जानी है, जिस पर करीब 58.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
हालांकि ट्रैफिक विभाग का मानना है कि मोदी मिल और कालकाजी फ्लाईओवर को जोड़ने के बाद भी भैरव मंदिर के पास जाम की समस्या बनी रह सकती है. यहां चार लेन की सड़क कई बार वाहनों की पार्किंग और अन्य कारणों से घटकर करीब एक से डेढ़ लेन तक रह जाती है. आस-पास मौजूद पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की कतार भी ट्रैफिक को प्रभावित करती है.
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आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक होगा कम?
इसी वजह से मोदी मिल से कालकाजी के रास्ते को आगे नेहरू प्लेस और फिर सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर से जोड़ने का प्रस्ताव अहम है. मोदी मिल से चिराग दिल्ली की दूरी करीब चार किलोमीटर है. इस बीच नेहरू प्लेस फ्लाईओवर का हिस्सा भी आता है. यदि इन सभी हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ा जाता है तो आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक को कम करने में मदद मिल सकती है.
वहीं, स्थानीय विधायक और दक्षिण जिले की जिला विकास समिति की अध्यक्ष शिखा राय ने कहा है कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के सामने रखा जाएगा. PWD की रिपोर्ट के बाद प्रस्तावित मार्ग का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा सकता है. इसके बाद सरकार आगे की कार्ययोजना पर फैसला लेगी.