Satya Niketan incident: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिरने और 7 लोगों की जान जाने के बाद हड़कंप मच गया है. इस दर्दनाक हादसे का संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को शहर के सभी पेइंग गेस्ट (PG) और निजी हॉस्टलों का एक हफ्ते के अंदर विस्तृत ऑडिट करने का सख्त निर्देश दिया है. ‘हॉस्टल डेज़’ नाम से मशहूर यह दशकों पुरानी इमारत लड़कों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी, जो रविवार को मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई.
अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच में यह साफ किया जाए कि क्या इमारत के लिए जरूरी अनुमतियां ली गई थीं. इसके साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया है. एमसीडी को यह भी जांचना होगा कि पीजी तय नियमों और बिल्डिंग बायलॉज के तहत चल रहे हैं या नहीं, और उनमें कितने छात्र रह रहे हैं.
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हॉस्टल की कमी बनी छात्रों की मजबूरी
दिल्ली विश्वविद्यालय में नियमित, वोकेशनल और ओपन लर्निंग मिलाकर 7 लाख से ज्यादा छात्र नामांकित हैं. इसके विपरीत, विश्वविद्यालय के पास सिर्फ 7,000 से 8,000 कमरों की सीमित क्षमता है. आंकड़ों के अनुसार, हर 31 छात्रों में से केवल 1 छात्र को ही हॉस्टल नसीब होता है. वर्ष 2025 की एक रिपोर्ट बताती है कि 30 हजार से ज्यादा ग्रेजुएट छात्रों ने आवेदन किया, लेकिन 10 फीसदी से भी कम को जगह मिली. कैंपस में कमरों की भारी किल्लत के कारण बाहरी छात्र असुरक्षित और भीड़भाड़ वाले निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं.
अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अवैध निर्माण पर गंभीर चिंता जताई. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि दो मंजिलों के लिए पास इमारतों की पुरानी नींव पर ही कई अतिरिक्त मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे छात्रों की जान खतरे में पड़ती है. हादसे के बाद डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कॉलेज प्रिंसिपलों को आवासीय सुविधाओं की समीक्षा करने और हॉस्टल निर्माण परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी.
सत्य निकेतन हादसा: MCD ने डीसी समेत 5 अफसरों को किया सस्पेंड
दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने के मामले में एमसीडी ने साउथ जोन के उपायुक्त (DC) समेत पांच बड़े अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया है. सस्पेंड किए गए अधिकारियों में दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, भवन विभाग के कार्यकारी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार शामिल हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लगातार जलभराव और धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा था, लेकिन नागरिक एजेंसियों और भवन मालिकों की अनदेखी ने इस बड़ी त्रासदी को दावत दी.
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ग्राउंड+1 की जगह खड़ी कर दी 5 मंजिलें
एमसीडी अधिकारियों की जांच में यह बात सामने आई है कि ढही हुई इमारत केवल 55 वर्ग गज के छोटे से भूखंड पर बनी थी. यह एक पुनर्वास कॉलोनी का हिस्सा थी, जहां नियमों के मुताबिक केवल ग्राउंड+1 (दो मंजिल) बनाने की ही अनुमति थी. इस इमारत का कोई नक्शा या भवन योजना भी पास नहीं कराई गई थी. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर इसे ग्राउंड+4 (पांच मंजिला) बना दिया गया.
शहर की सभी 5 मंजिला इमारतों को सील करने का आदेश
खोज और बचाव अभियान के दूसरे दिन स्थिति का जायजा लेने खुद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सत्य निकेतन पहुंचीं. मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि इमारत के बेसमेंट में लगातार पानी जमा होने के कारण यह हादसा हुआ. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने राजधानी की सभी पांच मंजिला इमारतों को तुरंत सील करने का सख्त आदेश जारी किया है. दूसरी ओर, घटना के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और भवन मालिक हरिराम बंसल की तलाश के लिए 10 अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं. तलाशी अभियान चलाकर पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के भिवाड़ी से धर दबोचा.
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