दिल्ली में सत्य निकेतन इलाके में पेइंग गेस्ट (PG) हाउस की 4 मंजिला बिल्डिंग ढहने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे का लाइव CCTV फुटेज सामने आया है, जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. वीडियो में देख सकते हैं कि बिल्डिंग कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गई. कुछ सेकंड में बिल्डिंग जमींदोज हो गई और चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया. वीडियो में देख सकते हैं कि बिल्डिंग के नीचे एक बुजुर्ग ने अपना स्टॉल लगाया हुआ था, लेकिन जब अचानक ऊपर से मलबा और धूल-मिट़्टी गिरने लगी तो खतरा भांपते ही बुजुर्ग जान बचाने के लिए दौड़ पड़ा.
MCD ने जारी किया डिमोलिशन का नोटिस
बीते दिन सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा एक्शन लिया है. क्योंकि हादसे में इलाके की पुरानी और जर्जर बिल्डिंगों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. भविष्य में इस तरह के हादसे न हो, इसके मद्देनजर नगर निगम ने बीते दिन ढही इमारत के बगल वाली बिल्डिंग को खाली कराने का नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस के अनुसार, दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) 1957 की धारा 348 के तहत मकान नंबर 13 खतरनाक और जर्जर हालत में है. इसलिए वहां रहने वाले लोगों, आस-पास के लोगों और राहगीरों के लिए खतरा है. मकान के मालिक को आदेश है कि वह नोटिस मिलने के बाद 3 दिन के अंदर इसे ध्वस्त कर दे. अगर तय समय सीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया तो नगर निगम खुद इमारत को गिरा देगा और इसमें आने वाले खर्च को मकान मालिक से वसूला जाएगा.
हादसे और 6 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?
आस-पास के लोगों का कहना है कि बिल्डिंग करीब 50 साल पुरानी है और जब हादसा हुआ, तब बिल्डिंग के बेसमेंट के अंदर रेनोवेशन का काम चल रहा था. ऐसे में सवाल यह है कि इतनी पुरानी इमारत में PG कैसे चल रहा था और इसकी अनुमति ली गई थी या नहीं? 50 साल पुरानी इमारत को 3 मंजिल की बजाय 5 मंजिल कैसे दिया गया? क्या इस बिल्डिंग का नक्शा पास था? 5 मंजिला इमारत बनाने की अनुमति ली गई थी या नहीं? अगर अनुमति नहीं थी तो इसे 5 मंजिला बनाने से रोका क्यों नहीं गया? अगर बिल्डिंग में छात्र रहते थे तो बेसमेंट में रेनोवेशन की मंजूरी किसने दी? क्या बिल्डिंग को चेक करने MCD के अधिकारी आए थे. बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भरा था, फिर भी बेसमेंट में रेनोवेशन चल रहा था तो 6 मौतों का जिम्मेदार कौन है?
हादसे के बाद MCD की वर्किंग पर उठ रहे सवाल
आखिर किराये से आने वाले पैसे के लालच में जिंदगी कब तक दांव पर लगती रहेगी? दिल्ली में हो रहे अग्निकांड और बिल्डिंग ढहने के हादसों की जिम्मेदारी कब और कैसे तय होगी? क्योंकि अगर बिल्डिंग पुरानी थी और वह कमजोर हो चुकी होगी. इस बीच पानी से भरे बेसमेंट में रेनोवेशन के काम ने नींव को उखाड़ दिया और बिल्डिंग गिर गई. स्ट्रक्चर कमजोर हो चुका था तो MCD ने समय रहते इस पर एक्शन क्यों नहीं लिया? और अगर सभी कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी तो बिल्डिंग ढह कैसे गई? धारा 105 BNS (गैर-इरादतन हत्या), धारा 290 BNS (इमारतों के निर्माण, मरम्मत या रख-रखाव में लापरवाही बरतना) और धारा 125(a) BNS: (उतावलेपन या लापरवाही से किसी की जान और सुरक्षा को खतरे में डालना और चोट पहुंचाना) के तहत मालिक हरिराम और दूसरे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जो सच उजागर करेंगे.