पंजाब-हिमाचल वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! 61 किमी लंबे नए हाईवे से दिल्ली पहुंचना होगा बेहद आसान, जाम से मिलेगी मुक्ति
Mohali Ambala Highway: अंबाला-चंडीगढ़ के बीच बन रहे 61 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का काम तेज हो गया है. इसके खुलने से मोहाली से अंबाला का सफर मात्र 50 मिनट का रह जाएगा.
Mohali Ambala Highway: पंजाब और हिमाचल प्रदेश से देश की राजधानी दिल्ली की तरफ सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी और शानदार खबर सामने आई है. अंबाला-चंडीगढ़ के बीच बन रहे 61 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का काम अब आखिरी चरण में पहुंच चुका है जिसके खुल जाने से लोगों को जीरकपुर, चंडीगढ़ और डेराबस्सी के भयंकर ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए परमानेंट मुक्ति मिल जाएगी. इस नए हाईवे के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद अंबाला और मोहाली के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 40 से 50 मिनट रह जाएगा. इस बेहद आधुनिक रोड प्रोजेक्ट के शुरू होने से हर दिन सफर करने वाले करीब 80,000 वाहन चालकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और केंद्र सरकार ने इस पूरे काम को इसी साल 2026 के आखिर तक मुकम्मल करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है.
दो चरणों में तैयार हो रहा है पूरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ट्राइसिटी रिंग रोड योजना के तहत साल 2020-21 में मंजूरी मिली थी और साल 2021-22 में इसकी जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ था. कुल 61 किलोमीटर लंबे अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर नेशनल हाईवे 205ए का निर्माण दो अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है. इसके पहले चरण में अंबाला के देवीनगर से मोहाली के आईटी सिटी चौक तक करीब 30 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है जिसका लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. शुरुआत में किसान आंदोलन और जमीन अधिग्रहण की सुस्त रफ्तार के कारण कुछ किलोमीटर के हिस्से में काम थोड़ा धीमा जरूर हुआ था, लेकिन अब उसने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है और सड़कों व पुलों के बचे हुए फिनिशिंग काम को साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा.
मोहाली-कुराली बाईपास चालू और किसानों को मिला भारी मुआवजा
इस पूरे प्रोजेक्ट का जो दूसरा चरण है वह आईटी सिटी चौक से सीधे कुराली तक जाता है जिसकी लंबाई 31.23 किलोमीटर है. यह हिस्सा पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है और इसे आम जनता के इस्तेमाल के लिए पहले ही खोल दिया गया है जिसे लोग मोहाली-कुराली बाईपास के नाम से भी जानते हैं. नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई ने जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को भारी-भरकम मुआवजा दिया है. शुरुआत में कम मुआवजे को लेकर कुछ गांवों में विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद मुआवजे की रकम को बढ़ाकर 1 करोड़ से 1.09 करोड़ रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया था. वहीं एयरपोर्ट रोड और मुख्य रास्तों के पास की वीआईपी जमीनों के लिए किसानों को 4.12 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक का रिकॉर्ड मुआवजा दिया गया है.
नए 6-लेन लिंक रोड से सीधे जुड़ेंगे पंचकूला और चंडीगढ़
इस पूरे प्रोजेक्ट को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए सरकार ने इसी साल फरवरी 2026 में करीब 1,463.95 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक नए 10.3 किलोमीटर लंबे सिक्स-लेन लिंक रोड को भी मंजूरी दी है. यह नया लिंक रोड इस हाईवे को सीधे जीरकपुर बाईपास से जोड़ देगा जिससे चंडीगढ़ और पंचकूला की तरफ जाने वाले वाहनों को शहर के भारी ट्रैफिक के अंदर नहीं घुसना पड़ेगा. वर्तमान में मोहाली से अंबाला जाने के लिए लोग जीरकपुर और डेराबस्सी वाले रास्ते का इस्तेमाल करते हैं जहां 40 से 45 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक से डेढ़ घंटे का समय बर्बाद होता है, जबकि बनूर-राजपुरा वाला वैकल्पिक रास्ता थोड़ा लंबा है. लेकिन इस नए ग्रीनफील्ड हाईवे के पूरी तरह चालू होते ही पूरा सफर बेहद सुगम, सुरक्षित और सुपरफास्ट हो जाएगा.
Mohali Ambala Highway: पंजाब और हिमाचल प्रदेश से देश की राजधानी दिल्ली की तरफ सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी और शानदार खबर सामने आई है. अंबाला-चंडीगढ़ के बीच बन रहे 61 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का काम अब आखिरी चरण में पहुंच चुका है जिसके खुल जाने से लोगों को जीरकपुर, चंडीगढ़ और डेराबस्सी के भयंकर ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए परमानेंट मुक्ति मिल जाएगी. इस नए हाईवे के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद अंबाला और मोहाली के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 40 से 50 मिनट रह जाएगा. इस बेहद आधुनिक रोड प्रोजेक्ट के शुरू होने से हर दिन सफर करने वाले करीब 80,000 वाहन चालकों को सीधा फायदा पहुंचेगा और केंद्र सरकार ने इस पूरे काम को इसी साल 2026 के आखिर तक मुकम्मल करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है.
दो चरणों में तैयार हो रहा है पूरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ट्राइसिटी रिंग रोड योजना के तहत साल 2020-21 में मंजूरी मिली थी और साल 2021-22 में इसकी जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ था. कुल 61 किलोमीटर लंबे अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर नेशनल हाईवे 205ए का निर्माण दो अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है. इसके पहले चरण में अंबाला के देवीनगर से मोहाली के आईटी सिटी चौक तक करीब 30 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है जिसका लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. शुरुआत में किसान आंदोलन और जमीन अधिग्रहण की सुस्त रफ्तार के कारण कुछ किलोमीटर के हिस्से में काम थोड़ा धीमा जरूर हुआ था, लेकिन अब उसने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है और सड़कों व पुलों के बचे हुए फिनिशिंग काम को साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा.
मोहाली-कुराली बाईपास चालू और किसानों को मिला भारी मुआवजा
इस पूरे प्रोजेक्ट का जो दूसरा चरण है वह आईटी सिटी चौक से सीधे कुराली तक जाता है जिसकी लंबाई 31.23 किलोमीटर है. यह हिस्सा पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है और इसे आम जनता के इस्तेमाल के लिए पहले ही खोल दिया गया है जिसे लोग मोहाली-कुराली बाईपास के नाम से भी जानते हैं. नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई ने जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को भारी-भरकम मुआवजा दिया है. शुरुआत में कम मुआवजे को लेकर कुछ गांवों में विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद मुआवजे की रकम को बढ़ाकर 1 करोड़ से 1.09 करोड़ रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया था. वहीं एयरपोर्ट रोड और मुख्य रास्तों के पास की वीआईपी जमीनों के लिए किसानों को 4.12 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक का रिकॉर्ड मुआवजा दिया गया है.
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नए 6-लेन लिंक रोड से सीधे जुड़ेंगे पंचकूला और चंडीगढ़
इस पूरे प्रोजेक्ट को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए सरकार ने इसी साल फरवरी 2026 में करीब 1,463.95 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक नए 10.3 किलोमीटर लंबे सिक्स-लेन लिंक रोड को भी मंजूरी दी है. यह नया लिंक रोड इस हाईवे को सीधे जीरकपुर बाईपास से जोड़ देगा जिससे चंडीगढ़ और पंचकूला की तरफ जाने वाले वाहनों को शहर के भारी ट्रैफिक के अंदर नहीं घुसना पड़ेगा. वर्तमान में मोहाली से अंबाला जाने के लिए लोग जीरकपुर और डेराबस्सी वाले रास्ते का इस्तेमाल करते हैं जहां 40 से 45 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक से डेढ़ घंटे का समय बर्बाद होता है, जबकि बनूर-राजपुरा वाला वैकल्पिक रास्ता थोड़ा लंबा है. लेकिन इस नए ग्रीनफील्ड हाईवे के पूरी तरह चालू होते ही पूरा सफर बेहद सुगम, सुरक्षित और सुपरफास्ट हो जाएगा.