दिल्ली में सर्दियों से पहले प्रदूषण पर बड़ा एक्शन, 4 महीने के लिए पार्किंग महंगी; बाहर के पुराने कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर भी रोक
Delhi Pollution: दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से पार्किंग शुल्क दोगुना करने, गैर-BS VI वाहनों पर रोक और कई सख्त कदमों का ऐलान किया गया है. आइए जानते हैं कैसे राजधानी का प्रदूषण कंट्रोल होगा.
Written By: Azhar Naim|Updated: Jun 21, 2026 12:30
Edited By : Azhar Naim|Updated: Jun 21, 2026 12:30
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दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बड़ा कदम. (Image: AI)
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले खतरनाक वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने एक बेहद कड़ा और एडवांस प्रदूषण नियंत्रण प्लान जारी किया है. इस योजना के तहत आम जनता को निजी वाहनों का उपयोग कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इसके लिए आने वाले 1 नवंबर 2026 से लेकर 28 फरवरी 2027 तक दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस को दोगुना (डबल) कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि समय रहते उठाए गए इन कड़े कदमों से इस बार सर्दियों में दिल्लीवालों को जहरीली हवा और स्मॉग से बड़ी राहत मिल सकती है.
प्रदूषण सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
इतना ही नहीं, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए इस नए फ्रेमवर्क में कुछ और बेहद सख्त नियम जोड़े गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड ऐसे सभी कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहन जो बीएस-VI (BS-VI) मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके दिल्ली में प्रवेश पर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक पूरी तरह से बंद रहेगी. हालांकि, सीएनजी (CNG), इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को इस प्रतिबंध से पूरी तरह बाहर रखा गया है. इसके साथ ही, दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर अब सिर्फ वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों को ही ईंधन दिया जाएगा, ताकि प्रदूषण करने वाले वाहन सड़क पर उतर ही न सके.
सरकार ने शुरू की एडवांस तैयारी
इस व्यापक प्रदूषण विरोधी अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने कई अन्य रणनीतिक कदम भी उठाए हैं. सर्दियों के दौरान सड़कों पर एक साथ लगने वाले ट्रैफिक जाम और उससे होने वाले धुएं को कम करने के लिए दफ्तरों के समय को अलग-अलग (Staggered Office Hours) किया जाएगा. इसके अलावा, खुले में कूड़ा-कचरा और बायोमास जलाने पर पूरी तरह से कानूनी रोक लगा दी गई है. साथ ही, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को काबू में करने के लिए भी सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार, इन व्यवस्थाओं को पहले ही घोषित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता और व्यापारियों को तैयारी का पूरा समय मिल सके.
साल 2027 तक 95% नई गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक
परिवहन विभाग के मुताबिक, दिल्ली सरकार का अंतिम लक्ष्य साल 2027 तक राजधानी में रजिस्टर्ड होने वाले कुल नए वाहनों में से 95 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करना है. इस एक्शन प्लान के तहत दिल्ली की सार्वजनिक बसों के पूरे बेड़े को धीरे-धीरे शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाएगा. इसके साथ ही सड़कों पर चलने वाले पुराने सीएनजी ऑटो-रिक्शा, टैक्सियों और हल्के कमर्शियल वाहनों को भी योजनाबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा. साथ ही, ईवी पॉलिसी 2.0 और हाइब्रिड गाड़ियों पर भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले खतरनाक वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने एक बेहद कड़ा और एडवांस प्रदूषण नियंत्रण प्लान जारी किया है. इस योजना के तहत आम जनता को निजी वाहनों का उपयोग कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इसके लिए आने वाले 1 नवंबर 2026 से लेकर 28 फरवरी 2027 तक दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस को दोगुना (डबल) कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि समय रहते उठाए गए इन कड़े कदमों से इस बार सर्दियों में दिल्लीवालों को जहरीली हवा और स्मॉग से बड़ी राहत मिल सकती है.
प्रदूषण सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
इतना ही नहीं, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए इस नए फ्रेमवर्क में कुछ और बेहद सख्त नियम जोड़े गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड ऐसे सभी कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहन जो बीएस-VI (BS-VI) मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके दिल्ली में प्रवेश पर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक पूरी तरह से बंद रहेगी. हालांकि, सीएनजी (CNG), इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को इस प्रतिबंध से पूरी तरह बाहर रखा गया है. इसके साथ ही, दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर अब सिर्फ वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों को ही ईंधन दिया जाएगा, ताकि प्रदूषण करने वाले वाहन सड़क पर उतर ही न सके.
सरकार ने शुरू की एडवांस तैयारी
इस व्यापक प्रदूषण विरोधी अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने कई अन्य रणनीतिक कदम भी उठाए हैं. सर्दियों के दौरान सड़कों पर एक साथ लगने वाले ट्रैफिक जाम और उससे होने वाले धुएं को कम करने के लिए दफ्तरों के समय को अलग-अलग (Staggered Office Hours) किया जाएगा. इसके अलावा, खुले में कूड़ा-कचरा और बायोमास जलाने पर पूरी तरह से कानूनी रोक लगा दी गई है. साथ ही, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को काबू में करने के लिए भी सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार, इन व्यवस्थाओं को पहले ही घोषित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता और व्यापारियों को तैयारी का पूरा समय मिल सके.
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साल 2027 तक 95% नई गाड़ियां होंगी इलेक्ट्रिक
परिवहन विभाग के मुताबिक, दिल्ली सरकार का अंतिम लक्ष्य साल 2027 तक राजधानी में रजिस्टर्ड होने वाले कुल नए वाहनों में से 95 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करना है. इस एक्शन प्लान के तहत दिल्ली की सार्वजनिक बसों के पूरे बेड़े को धीरे-धीरे शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाएगा. इसके साथ ही सड़कों पर चलने वाले पुराने सीएनजी ऑटो-रिक्शा, टैक्सियों और हल्के कमर्शियल वाहनों को भी योजनाबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा. साथ ही, ईवी पॉलिसी 2.0 और हाइब्रिड गाड़ियों पर भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
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