राजधानी दिल्ली में 22 से 24 मई तक ट्रकों की तीन दिन की हड़ताल होने जा रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ सकता है. ट्रक यूनियनों ने सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ ये बड़ा कदम उठाया है. इस दौरान दिल्ली में माल सप्लाई करने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित रह सकती है और बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों की एंट्री भी बंद रहेगी. इस हड़ताल का सबसे बड़ा कारण पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में बढ़ोतरी है. सरकार ने हाल ही में दिल्ली में एंट्री करने वाले कमर्शियल वाहनों पर ये शुल्क बढ़ा दिया है, जिसका ट्रक ऑपरेटर विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये फैसला ट्रांसपोर्ट बिजनेस पर एक्सट्रा बोझ डाल रहा है.
क्यों नाराज है ट्रक यूनियन?
ट्रक यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने सिर्फ ECC ही नहीं बढ़ाया, बल्कि कई और सख्त नियम भी लागू किए हैं. इनमें एक बड़ा मुद्दा BS-4 वाहनों के दिल्ली में एंट्री पर लगाया गया बैन भी है. यूनियनों का कहना है कि इससे लाखों वाहन प्रभावित होंगे, जबकि ये वाहन अभी ज्यादा पुराने भी नहीं हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टर्स इस बात से भी नाराज हैं कि BS-6 जैसे नए और पर्यावरण फ्रैंडली वाहनों पर भी ECC लगाया जा रहा है. उनका कहना है कि जो वाहन पहले से प्रदूषण मानकों का पालन कर रहे हैं, उन पर एक्सट्रा पैनल्टी शुल्क लगाना गलत है. हालांकि सरकार का कहना है कि ECC और बाकी नियमों का मकसद प्रदूषण को कम करना है. सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद इन नियमों को लागू किया गया है ताकि दिल्ली की हवा को साफ रखा जा सके.
क्या खुला रहेगा, क्या बंद?
फिलहाल, अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि स्ट्राइक की वजह से कुछ बंद रहेगा, लेकिन इस हड़ताल का असर आम लोगों की लाइफ पर भी साफ दिखाई दे सकता है. खासकर फल-सब्जी, दूध, दवा और रोजमर्रा के जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने की उम्मीद है. बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं और कुछ जगहों पर सामान की कमी भी हो सकती है. जानकारों का कहना है कि दिल्ली में रोजाना हजारों ट्रक जरूरी सामान लेकर आते हैं. ऐसे में अगर तीन दिन तक ट्रकों की आवाजाही रुकती है, तो सप्लाई चेन पर दबाव पड़ना तय है. फिलहाल, अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और ट्रक यूनियनों के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं. अगर बातचीत सफल नहीं होती है, तो ये हड़ताल लंबी खिंच सकती है.










