---विज्ञापन---

केंद्र सरकार पर क्यों भड़कीं दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा? लापरवाही पर उठाए सवाल

Justice Swarana Kanta Sharma: दिल्ली हाई कोर्ट जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है, ये मामला 'प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट' से जुड़े हैंडबुक का है, जिसमें पीड़ित महिला का नाम उजागर किया गया था.

---विज्ञापन---

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की आलोचना की है क्योंकि उन्होंने वर्कप्लेस पर महिलाओं सुरक्षा से जुड़ी एक ऑफिशियल हैंडबुक में उस पीड़िता का नाम छापा, जिसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न हुआ था. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यौन अपराध की शिकार महिला की पहचान उजागर नहीं की जा सकती और इस बात पर जोर दिया कि कानून सरकारी अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होता है.

‘नाम कैसे शामिल हुआ?’

अदालत ने सवाल किया कि केंद्र सरकार की तरफ से जारी और उसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर अवेलेबल हैंडबुक में महिला का नाम कैसे शामिल हो गया. ये मामला कथित आरोपी की तरफ दायर एक याचिका के जरिए कोर्ट के सामने आया. उसने तर्क दिया कि बाद में विवाद सुलझ गया था और उसने सरकार की ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट’ (POSH) हैंडबुक से अपना नाम हटाने की मांग की.

---विज्ञापन---

एजुकेशनल मकसद से पब्लिश की गई हैंडबुक

याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक कथित घटना से जुड़े लेबर ट्रिब्यूनल के एक आदेश को हैंडबुक में मिसाल के तौर पर शामिल किया गया था. कथित तौर पर उस मैटेरियल में पिटीशनर और महिला, दोनों की पहचान से जुड़ी जानकारी थी. केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि हैंडबुक नवंबर 2015 में एजुकेशनल मकसद से पब्लिश की गई थी, जबकि दोनों पक्षों के बीच समझौता हाल ही में हुआ है.

यह भी पढ़ें- Women Rights: महिलाओं की ताकत हैं ये 5 अधिकार; जानें कब और कैसे कर सकती हैं इस्तेमाल?

---विज्ञापन---

‘पहचान छिपाना जरूरी’

हालांकि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने साफ किया कि समझौता होने का मतलब ये नहीं है कि पीड़ित महिला की पहचान उजागर की जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि आम तौर पर अदालती फैसलों में भी पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनके नाम गुप्त रखे जाते हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि पीड़ितों की पहचान उजागर करने से जुड़े कानूनी सुरक्षा उपाय हैंडबुक के पब्लिश होने से पहले से ही मौजूद थे.

गूगल से डी-इंडेक्सिंग की भी मांग

पिटीशनर ने गूगल को ऑनलाइन कंटेंट को डी-लिंक और डी-इंडेक्स करने का निर्देश देने की भी मांग की है. ये कथित घटना 2001 की है. याचिकाकर्ता ने ये भी दावा किया कि उसने आरोपों को लेकर दिल्ली में महिला के खिलाफ मानहानि का मुकदमा शुरू किया था.

---विज्ञापन---

First published on: Sep 08, 2026 09:35 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola