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Delhi Schools: दिल्ली के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के लिए बड़ा आदेश! CM की हाई-लेवल बैठक में लिया गया ये फैसला, लागू होगी नई सुरक्षा व्यवस्था; जानें डिटेल

Delhi Schools: दिल्ली के सभी 5633 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में जुलाई के अंत तक बाल सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य कर दिया गया है. पॉक्सो नियमों के तहत बच्चों की सुरक्षा के लिए यह सख्त फैसला लिया गया है.

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मुख्य बातें:

  • दिल्ली के सभी 5633 स्कूलों में जुलाई के अंत तक बाल सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य है.
  • इस नए आदेश के दायरे में दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूल आएंगे.
  • स्कूलों की सुरक्षा जांचने के लिए पुलिस, अधिकारियों और पेरेंट्स की टीम सेफ्टी ऑडिट करेगी.
  • बच्चों को गुड टच-बैड टच समझाने के लिए अब दिल्ली के हर स्कूल में काउंसलर होंगे.
  • पहली बार अपराध करने वाले नाबालिगों के सुधार और पुनर्वास के लिए भी काउंसिलिंग होगी.

Delhi Schools: दिल्ली में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक बहुत बड़ा और अहम फैसला लिया है. अब राजधानी के हर छोटे-बड़े स्कूल में बच्चों की हिफाजत के लिए चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी यानी बाल सुरक्षा समिति का गठन किया जाएगा. दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि जुलाई के महीने के खत्म होने से पहले सभी स्कूलों को यह कमेटी हर हाल में बनानी होगी. यह कदम बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाले कड़े कानून पॉक्सो को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने के लिए उठाया गया है. सोमवार को हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में यह फैसला लिया गया, जिसमें उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बाल सुरक्षा माह अभियान की समीक्षा की.

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इस नए आदेश के दायरे में कौन-कौन से स्कूल आएंगे?

अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इस तरह की चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटियां पहले ही बनाई जा चुकी हैं. लेकिन अब आए नए आदेशों के दायरे में दिल्ली के बाकी बचे सभी स्कूल भी आएंगे. इसमें सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, नगर निगम के स्कूल, एनडीएमसी के स्कूल, दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूल और दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूल शामिल हैं. इस नए आदेश के बाद अब दिल्ली के सभी 5633 स्कूल इस सुरक्षा घेरे में आ जाएंगे. इसके साथ ही नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पॉक्सो एक्ट की गाइडलाइंस के आधार पर स्कूलों को एक ‘स्टूडेंट सेफ्टी चेकलिस्ट’ भी लागू करनी होगी.

यह भी पढ़ें: दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाने के मिशन पर रेखा गुप्ता सरकार, ट्रैफिक, अतिक्रमण और यमुना सफाई पर तेज हुआ काम

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पेरेंट्स और पुलिस मिलकर स्कूलों का सेफ्टी ऑडिट कैसे करेंगे?

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागजों पर न रहे, इसके लिए जमीन पर भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. अब स्कूलों में तैनात टीचर्स, स्टाफ और मास्टर ट्रेनर्स को पॉक्सो कानून की खास ट्रेनिंग दी जाएगी. अगर कभी कोई अप्रिय घटना होती है, तो उससे निपटने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी चालू किया जाएगा. सबसे खास बात यह है कि स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को जांचने के लिए स्पेशल टीमें बनाई जाएंगी, जो स्कूलों का ‘सेफ्टी ऑडिट’ करेंगी. इस टीम में केवल सरकारी अफसर ही नहीं होंगे, बल्कि बच्चों के माता-पिता, स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और दिल्ली पुलिस के लोग भी शामिल रहेंगे.

हर स्कूल में काउंसलर की तैनाती से बच्चों को क्या फायदा होगा?

बच्चों के मानसिक तनाव को दूर करने और उन्हें जागरूक करने के लिए काउंसिलिंग को अनिवार्य किया जा रहा है. फिलहाल दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 1000 एजुकेशनल एंड वोकेशनल गाइडेंस काउंसलर काम कर रहे हैं. ये काउंसलर बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’, जेंडर सेंसिटाइजेशन और पर्सनल बाउंड्रीज के बारे में समझाते हैं. अब अफसरों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे काउंसलर्स की उपलब्धता दिल्ली के हर एक स्कूल में पक्की की जाए. वहीं, दिल्ली पुलिस को भी इस अभियान में मुस्तैद रहने को कहा गया है. पुलिस न सिर्फ स्कूल जाने वाले बच्चों, बल्कि लापता व बेघर बच्चों, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और अनाथालयों में रह रहे बच्चों की सुरक्षा का भी जिम्मा संभालेगी.

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माता-पिता को जागरूक करने के लिए क्या योजना बनाई गई है?

महिला एवं बाल विकास विभाग इस मुहिम को और बड़ा रूप देने जा रहा है. आंगनवाड़ी-सह-पालना केंद्रों, चाइल्ड केयर संस्थानों और मोबाइल वैन के जरिए सीधे आम लोगों और पेरेंट्स तक पहुंच बनाई जाएगी. स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी पेरेंट-टीचर मीटिंग्स में ऑडियो-विजुअल और पोस्टर्स के जरिए माता-पिता को बाल सुरक्षा और पॉक्सो नियमों के प्रति जागरूक करें. इसके साथ ही इस पूरी व्यवस्था में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि अगर कोई नाबालिग पहली बार किसी अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसे सुधारने के लिए सही काउंसिलिंग और पुनर्वास की मदद दी जाए, ताकि वह दोबारा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके.

निष्कर्ष:

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दिल्ली सरकार का यह फैसला स्कूली बच्चों को एक सुरक्षित माहौल देने की दिशा में बेहद सराहनीय कदम है. पुलिस, पेरेंट्स और स्कूल प्रशासन के आपसी तालमेल और कड़े नियमों से अब बच्चों की सुरक्षा को हर स्तर पर मजबूत किया जा सकेगा.

Frequently Asked Questions

Ans. दिल्ली के सभी सरकारी और प्राइवेट को मिलाकर कुल 5633 स्कूलों में यह व्यवस्था लागू होगी.
Ans. दिल्ली के सभी स्कूलों को हर हाल में जुलाई के अंत तक इस कमेटी का गठन करना होगा.
Ans. इसमें बच्चों के पेरेंट्स, स्कूल प्रिंसिपल, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और दिल्ली पुलिस शामिल होगी.
Ans. काउंसलर्स बच्चों को मुख्य रूप से 'गुड टच और बैड टच', जेंडर सेंसिटाइजेशन और पर्सनल बाउंड्रीज के बारे में समझाएंगे.
Ans. हां, यह नियम दिल्ली के सभी प्राइवेट, सरकारी, नगर निगम और कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा.
First published on: Jul 07, 2026 12:25 PM

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Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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