Auto, Cab, Truck Strike: दिल्ली में आज से 2 बड़ीं हड़ताल, लाखों लोग होंगे परेशान, जानें क्या खुला क्या बंद, क्यों हो रहा चक्का जाम?
Delhi Strike: दिल्ली में 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्ट हड़ताल के चलते ऑटो, टैक्सी और भारी ट्रकों की सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं. ग्रीन टैक्स और बढ़ती ईंधन कीमतों के विरोध में हो रही इस हड़ताल से ट्रैफिक, यात्रा और जरूरी सामानों की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है. आइए जानते हैं इस हड़ताल में क्या बदं रहेगा और क्या खुला.
Written By: Azhar Naim|Updated: May 21, 2026 11:29
Edited By : Azhar Naim|Updated: May 21, 2026 11:29
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दिल्ली में आज बड़ी हड़ताल. (Image AI)
हाइलाइट्स
News24 AI द्वारा निर्मित • संपादकीय टीम द्वारा जांचा गया
दिल्ली ट्रांसपोर्ट हड़ताल का संदर्भ
दिल्ली में 21 से 23 मई तक दो बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों ने चक्का जाम की घोषणा की है, जिससे ऑटो, टैक्सी और माल ढोने वाले ट्रकों का परिचालन प्रभावित होगा.
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने दिल्ली सरकार और CAQM द्वारा लगाए गए 'ग्रीन टैक्स' के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे प्रति ट्रिप 2500 से 3000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
ऑटो और टैक्सी चालक CNG, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों तथा Ola, Uber, Rapido जैसी ऐप-आधारित कंपनियों द्वारा आर्थिक शोषण के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं.
हड़ताल के संभावित प्रभाव और विकल्प
इस हड़ताल से दिल्ली-NCR में हरी सब्जियां, फल, दूध और पीने के पानी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं, हालांकि दिल्ली मेट्रो और DTC बसें सामान्य रूप से चलती रहेंगी.
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देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किलें आने वाले तीन दिनों तक काफी बढ़ने वाली हैं. दरअसल, दिल्ली में एक साथ दो बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों ने चक्का जाम करने का ऐलान कर दिया है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन और जेब पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 21 मई से लेकर 23 मई तक दिल्ली की सड़कों पर ऑटो, टैक्सी और माल ढोने वाले भारी ट्रकों की रफ्तार पूरी तरह थमने वाली है. इस महा-हड़ताल के कारण सुबह-सुबह ऑफिस जाने वाले नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
दिल्ली में ट्रकों और भारी व्यावसायिक वाहनों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था 'ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस' (AIMTC) ने इस 3 दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है. ट्रांसपोर्टर्स की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह दिल्ली सरकार और CAQM द्वारा लगाया गया 'ग्रीन टैक्स' यानी पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) है. ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ दिल्ली को ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की बात कही थी, लेकिन CAQM और दिल्ली सरकार ने सभी भारी वाहनों पर टैक्स लागू कर दिया. उनका कहना है कि हर ट्रिप पर 2500 से 3000 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जबकि सीधे दिल्ली आने वाले वाहनों को इस टैक्स से बाहर रखा जाना चाहिए. वे दिल्ली बॉर्डर पर एमसीडी के टोल बैरियर हटाने और प्रदूषण मुक्त BS-6 ट्रकों को इस टैक्स से पूरी तरह बाहर रखने की मांग कर रहे हैं.
ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों का भी फूटा गुस्सा
भारी वाहनों के साथ-साथ दिल्ली की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों ने भी 21 से 23 मई तक सेवाएं पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है. चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने बताया कि सीएनजी (CNG), पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है. सीएनजी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से बुनियादी किराए में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. यूनियन की मांग है कि सरकार किराये में बढ़ोतरी करें. ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ (All India Motor Transport Congress) ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चिट्ठी लिखकर अपनी मांगें रखीं.
यूनियन ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा कि 'ओला, उबर और रैपिडो (Ola, Uber and Rapido) जैसी ऐप-आधारित कंपनियां पूरी तरह मनमाने ढंग से काम कर रही हैं, जिसके कारण दिल्ली के गरीब कमर्शियल ड्राइवर्स गंभीर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं.' इसी दोहरे आर्थिक दबाव के विरोध में सभी परिवहन संगठनों ने मिलकर इन 3 दिनों तक चक्का जाम रखने और सेवाएं पूरी तरह ठप रखने की सामूहिक अपील की है.
सब्जी, दूध और राशन हो सकते हैं महंगे
इस चक्का जाम का सबसे बड़ा झटका दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के आम उपभोक्ताओं को लग सकता है. चूंकि यह हड़ताल लगातार तीन दिनों तक चलेगी, इसलिए दिल्ली-एनसीआर में रोजाना होने वाली जरूरी चीजों की सप्लाई चैन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. बाहरी राज्यों से दिल्ली की थोक मंडियों (जैसे आजादपुर मंडी) में आने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध और पीने के पानी के टैंकरों की आवक कम होने की पूरी आशंका है. अगर मांग और आपूर्ति का यह संतुलन बिगड़ता है, तो स्थानीय बाजारों में रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतें अचानक काफी बढ़ सकती हैं. यानी इस ट्रांसपोर्ट हड़ताल का सीधा असर आम जनता के घरेलू बजट और उनकी जेब पर पड़ने जा रहा है.
इन 3 दिनों में क्या खुला रहेगा और क्या रहेगा बंद?
अगर आपको इन तीन दिनों के भीतर घर से बाहर निकलना है, तो यह जान लेना बेहद जरूरी है कि दिल्ली में क्या चालू है और क्या बंद.
राहत की बात यह है कि इस महा-हड़ताल के दौरान दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) और डीटीसी (DTC) की सरकारी बसें पूरी तरह अपने तय समय पर चलती रहेंगी, इसलिए आप सफर के लिए इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसके अलावा, दिल्ली के सभी मुख्य बाजार, शॉपिंग मॉल, स्कूल, दफ्तर और लाल किला या कुतुब मीनार जैसे पर्यटन स्थल सामान्य रूप से खुले रहेंगे.
जहां तक आपातकालीन सेवाओं का सवाल है, अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और इमरजेंसी दवा दुकानें 20 मई की आंशिक देशव्यापी केमिस्ट हड़ताल के बाद अब पूरी तरह खुली रहेंगी. हालांकि, सड़कों पर ऑटो और ओला-उबर जैसी टैक्सियां न के बराबर मिलेंगी, इसलिए रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट जाने के लिए सिर्फ मेट्रो का ही उपयोग करें.
देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किलें आने वाले तीन दिनों तक काफी बढ़ने वाली हैं. दरअसल, दिल्ली में एक साथ दो बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों ने चक्का जाम करने का ऐलान कर दिया है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन और जेब पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 21 मई से लेकर 23 मई तक दिल्ली की सड़कों पर ऑटो, टैक्सी और माल ढोने वाले भारी ट्रकों की रफ्तार पूरी तरह थमने वाली है. इस महा-हड़ताल के कारण सुबह-सुबह ऑफिस जाने वाले नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
दिल्ली में ट्रकों और भारी व्यावसायिक वाहनों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ (AIMTC) ने इस 3 दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है. ट्रांसपोर्टर्स की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह दिल्ली सरकार और CAQM द्वारा लगाया गया ‘ग्रीन टैक्स’ यानी पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) है. ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ दिल्ली को ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की बात कही थी, लेकिन CAQM और दिल्ली सरकार ने सभी भारी वाहनों पर टैक्स लागू कर दिया. उनका कहना है कि हर ट्रिप पर 2500 से 3000 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जबकि सीधे दिल्ली आने वाले वाहनों को इस टैक्स से बाहर रखा जाना चाहिए. वे दिल्ली बॉर्डर पर एमसीडी के टोल बैरियर हटाने और प्रदूषण मुक्त BS-6 ट्रकों को इस टैक्स से पूरी तरह बाहर रखने की मांग कर रहे हैं.
ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों का भी फूटा गुस्सा
भारी वाहनों के साथ-साथ दिल्ली की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों ने भी 21 से 23 मई तक सेवाएं पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है. चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने बताया कि सीएनजी (CNG), पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है. सीएनजी के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से बुनियादी किराए में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. यूनियन की मांग है कि सरकार किराये में बढ़ोतरी करें. ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ (All India Motor Transport Congress) ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चिट्ठी लिखकर अपनी मांगें रखीं.
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यूनियन ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा कि ‘ओला, उबर और रैपिडो (Ola, Uber and Rapido) जैसी ऐप-आधारित कंपनियां पूरी तरह मनमाने ढंग से काम कर रही हैं, जिसके कारण दिल्ली के गरीब कमर्शियल ड्राइवर्स गंभीर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं.’ इसी दोहरे आर्थिक दबाव के विरोध में सभी परिवहन संगठनों ने मिलकर इन 3 दिनों तक चक्का जाम रखने और सेवाएं पूरी तरह ठप रखने की सामूहिक अपील की है.
सब्जी, दूध और राशन हो सकते हैं महंगे
इस चक्का जाम का सबसे बड़ा झटका दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के आम उपभोक्ताओं को लग सकता है. चूंकि यह हड़ताल लगातार तीन दिनों तक चलेगी, इसलिए दिल्ली-एनसीआर में रोजाना होने वाली जरूरी चीजों की सप्लाई चैन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. बाहरी राज्यों से दिल्ली की थोक मंडियों (जैसे आजादपुर मंडी) में आने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध और पीने के पानी के टैंकरों की आवक कम होने की पूरी आशंका है. अगर मांग और आपूर्ति का यह संतुलन बिगड़ता है, तो स्थानीय बाजारों में रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतें अचानक काफी बढ़ सकती हैं. यानी इस ट्रांसपोर्ट हड़ताल का सीधा असर आम जनता के घरेलू बजट और उनकी जेब पर पड़ने जा रहा है.
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इन 3 दिनों में क्या खुला रहेगा और क्या रहेगा बंद?
अगर आपको इन तीन दिनों के भीतर घर से बाहर निकलना है, तो यह जान लेना बेहद जरूरी है कि दिल्ली में क्या चालू है और क्या बंद.
राहत की बात यह है कि इस महा-हड़ताल के दौरान दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) और डीटीसी (DTC) की सरकारी बसें पूरी तरह अपने तय समय पर चलती रहेंगी, इसलिए आप सफर के लिए इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसके अलावा, दिल्ली के सभी मुख्य बाजार, शॉपिंग मॉल, स्कूल, दफ्तर और लाल किला या कुतुब मीनार जैसे पर्यटन स्थल सामान्य रूप से खुले रहेंगे.
जहां तक आपातकालीन सेवाओं का सवाल है, अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और इमरजेंसी दवा दुकानें 20 मई की आंशिक देशव्यापी केमिस्ट हड़ताल के बाद अब पूरी तरह खुली रहेंगी. हालांकि, सड़कों पर ऑटो और ओला-उबर जैसी टैक्सियां न के बराबर मिलेंगी, इसलिए रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट जाने के लिए सिर्फ मेट्रो का ही उपयोग करें.
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