Mehrauli Assembly Seat: दिल्ली विधानसभा चुनावों में सभी पार्टियां तेजी से प्रचार में जुटी हुई हैं। कड़कड़ाती ठंड में भी दिल्ली का सियासी पारा हाई है। दिल्ली में 5 फरवरी को वोटिंग होगी, 8 फरवरी को नतीजों का ऐलान किया जाएगा। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर इस बार लड़ाई रोमांचक है। हाईप्रोफाइल सीट महरौली में बीजेपी-कांग्रेस और आप में तगड़ा मुकाबला है। 2015 और 2020 विधानसभा चुनाव में इस सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) ने जीत हासिल की थी। आप पर इस बार हैट्रिक बनाने का दबाव है।
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महरौली सीट दक्षिण दिल्ली संसदीय इलाके का हिस्सा है, जो गुरुग्राम और वसंत कुंज से सटी है। कुसुमपुर पहाड़ी, लाडोसराय, साकेत और JNU के अलावा इस सीट से कई आवासीय कॉलोनियों भी जुड़ी हुई हैं। महरौली कभी गुलाम वंश की राजधानी थी, जहां कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुब मीनार बनवाई थी। कुतुब मीनार आज यूनेस्को की विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल है। इस इलाके में सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह भी है, जिसका निर्माण 13वीं सदी में करवाया गया था।
यह सीट 1993 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और आप तीनों दलों के विधायक बनते रहे हैं। 1993, 1998 और 2013 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। 2003 और 2008 में यहां से कांग्रेस जीती। वहीं, 2015 और 2020 में आप ने जीत हासिल की।
मौजूदा समय में यहां से नरेश यादव विधायक हैं, जिनको इस बार फिर आप ने टिकट दिया था, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। उनके ऊपर कुरान की बेअदबी करने के आरोप लगे थे। अब पार्टी ने महेंद्र चौधरी को टिकट दिया है। उनकी पत्नी इसी जगह से पार्षद हैं। बीजेपी ने यहां से गजेंद्र यादव और कांग्रेस ने पुष्पा सिंह पर दांव खेला है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं।
जाट वोटरों का दबदबा
2020 के चुनाव में नरेश यादव को 62417 (54.27 फीसदी) वोट मिले थे। बीजेपी की कुसुम खत्री को 44256 (38.48 फीसदी) और कांग्रेस के महेंद्र चौधरी को 6952 (6.04 फीसदी) वोट मिले थे। यहां जाट वोटरों का दबदबा है। जाट 16 फीसदी, मुस्लिम 6.9 फीसदी, ईसाई समाज के 1.7 फीसदी वोट हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 216404 हैं, जिनमें 118855 पुरुष और 97536 महिलाएं हैं। यहां 13 वोट थर्ड जेंडर्स के हैं।