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CJP प्रोटेस्ट में जिन पर हुई FIR, उन्हें कितने साल की हो सकती है सजा; जानें धरना प्रदर्शन में उत्पात मचाने पर किन धाराओं में दर्ज होता है केस?

जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने छात्रों पर कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि सीजेपी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए छात्रों पर किन धाराओं में FIR दर्ज की गई है और उनमें कितने साल तक की सजा हो सकती है?

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राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित CJP के ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई, सुरक्षाकर्मियों पर हमला हुआ, सरकारी कामकाज में बाधा डाली गई और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया.

इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (PDPP Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. वहीं, अब सवाल ये है कि सीजेपी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए छात्रों पर किन धाराओं में FIR दर्ज की गई है और उनमें कितने साल तक की सजा हो सकती है?

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इन धाराओं में दर्ज होती है FIR

पुलिस के अनुसार, आंदोलन के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(बी), 221, 132, 121(1), 189(3), 190, 191(2), 191(3), 192, 324(5), 109(1), 125, 3(5) और 61(2) सहित कई धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं.

इसके अलावा आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25(1AB) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम की धारा 3 को भी FIR में शामिल किया गया है. इन धाराओं में गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा, लोक सेवक पर हमला, आपराधिक साजिश, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और गंभीर हिंसक अपराध जैसे आरोप छात्रों पर लगाए गए हैं.

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किस आरोप में कितनी हो सकती है सजा?

विभिन्न धाराओं में छात्रों पर दर्ज हुए मामलों में यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो कुछ मामलों में 10 साल तक की जेल, जबकि आर्म्स एक्ट की कुछ धाराओं में 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. हालांकि सिर्फ FIR दर्ज भर होने से कोई भी व्यक्ति दोषी करार नहीं दिया जा सकता है जब तक उस पर लगे आरोप अदालत में साबित ना हो और जब तक उनके खिलाफ कोई सबूत पेश ना हो.

इसके अलावा दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कार्य में बाधा, लोक सेवक पर हमला, आपराधिक साजिश और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने जैसी धाराओं में अपराध की प्रकृति के अनुसार तीन महीने से लेकर पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है.

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दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है. वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग आरोप भी लगाए गए हैं. ऐसे में अब पूरे मामले की दिशा पुलिस जांच, मौजूद सबूतों और अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगी. दोष साबित होने पर ही संबंधित धाराओं के तहत सजा मिलेगी.

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First published on: Jul 27, 2026 09:54 AM

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