दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे CJP प्रोटेस्ट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. क्या प्रोटेस्ट का मंच अब आम जनता की आवाज उठाने के बजाय वांटेड अपराधियों का नया ठिकाना बनता जा रहा है? दिल्ली पुलिस के हाई-टेक 'फेस रिकग्निशन सिस्टम' (FRS) की जांच में कुछ ऐसा ही सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. दिल्ली पुलिस द्वारा प्रोटेस्ट एरिया में तैनात किए गए FRS कैमरों ने डेटाबेस का मिलान करते हुए 215 ऐसे अपराधियों की पहचान की है, जो पुलिस रिकॉर्ड में 'वांटेड' घोषित हैं. ये वो अपराधी हैं जो संगीन वारदातों में शामिल रहे हैं और पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी.
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हिंसा और दंगे भड़काने की साजिश?
जांच एजेंसियों का दावा है कि ये अपराधी सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने नहीं आए थे, बल्कि इनका मुख्य मकसद उपद्रवी भीड़ जुटाना था। ये लोग प्रदर्शन की आड़ में माहौल को दंगों जैसा बनाने और हिंसा भड़काने की कोशिशों में लगातार सक्रिय थे। FRS सिस्टम ने इन सभी अपराधियों की स्पष्ट तस्वीरें और डेटा कैप्चर किया है, जो इस बात का पक्का सबूत हैं कि प्रदर्शन स्थल पर इनकी मौजूदगी महज एक इत्तेफाक नहीं थी।
अपराध का ग्राफ और प्रोटेस्ट साइट का कनेक्शन
हाल के दिनों में जब दिल्ली में सामान्य अपराधों का ग्राफ नीचे आ रहा था, तब इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि आखिर ये हार्डकोर क्रिमिनल्स कहां गायब हैं? अब पुलिस के इस खुलासे के बाद यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये अपराधी कानूनी कार्रवाई से बचने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रोटेस्ट साइट को ढाल बना रहे थे?
पुलिस के पास इन सभी 215 वांटेड अपराधियों के डिजिटल सबूत और तस्वीरें मौजूद हैं, जिनके आधार पर अब आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे CJP प्रोटेस्ट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. क्या प्रोटेस्ट का मंच अब आम जनता की आवाज उठाने के बजाय वांटेड अपराधियों का नया ठिकाना बनता जा रहा है? दिल्ली पुलिस के हाई-टेक ‘फेस रिकग्निशन सिस्टम’ (FRS) की जांच में कुछ ऐसा ही सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. दिल्ली पुलिस द्वारा प्रोटेस्ट एरिया में तैनात किए गए FRS कैमरों ने डेटाबेस का मिलान करते हुए 215 ऐसे अपराधियों की पहचान की है, जो पुलिस रिकॉर्ड में ‘वांटेड’ घोषित हैं. ये वो अपराधी हैं जो संगीन वारदातों में शामिल रहे हैं और पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी.
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जांच एजेंसियों का दावा है कि ये अपराधी सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने नहीं आए थे, बल्कि इनका मुख्य मकसद उपद्रवी भीड़ जुटाना था। ये लोग प्रदर्शन की आड़ में माहौल को दंगों जैसा बनाने और हिंसा भड़काने की कोशिशों में लगातार सक्रिय थे। FRS सिस्टम ने इन सभी अपराधियों की स्पष्ट तस्वीरें और डेटा कैप्चर किया है, जो इस बात का पक्का सबूत हैं कि प्रदर्शन स्थल पर इनकी मौजूदगी महज एक इत्तेफाक नहीं थी।
अपराध का ग्राफ और प्रोटेस्ट साइट का कनेक्शन
हाल के दिनों में जब दिल्ली में सामान्य अपराधों का ग्राफ नीचे आ रहा था, तब इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि आखिर ये हार्डकोर क्रिमिनल्स कहां गायब हैं? अब पुलिस के इस खुलासे के बाद यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये अपराधी कानूनी कार्रवाई से बचने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रोटेस्ट साइट को ढाल बना रहे थे?
पुलिस के पास इन सभी 215 वांटेड अपराधियों के डिजिटल सबूत और तस्वीरें मौजूद हैं, जिनके आधार पर अब आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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