Delhi PG Develops Massive Cracks: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पेइंग गेस्ट बिल्डिंग के गिरने और उसमें कई स्टूडेंट्स की मौत के कुछ ही दिनों बाद, चिराग दिल्ली में एक और पीजी में रहने वाले छात्रों को वहां से निकलना पड़ा. दरअसल बिल्डिंग में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं और खबर है कि दीवार का एक हिस्सा भी गिर गया था
बिल्डिंग में कई खामियां
दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह कॉलेज के छात्रों ने' इंडिया टुडे' को बताया कि 6 मंजिला इस बिल्डिंग में तकरीबन 50-60 छात्र रहते थे और इसमें कई साफ दरारें, लीकेज और दूसरी स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स थीं. बेसमेंट में रहने वाले छात्र अपने कमरों की हालत को लेकर ज्यादा परेशान थे. एक स्टूडेंट ने कहा, 'हम बेसमेंट में रह रहे थे और वहां की हालत और भी खराब थी. वहां बहुत सारे क्रैक्स थे.'
---विज्ञापन---
छात्रों ने छोड़ा ठिकाना
पीजी बिल्डिंग में मौजूद स्टूडेंट्स के मुताबिक वहां के मैनेजमेंट ने शुरू में दरारों को मामूली बताया और कहा कि वो कुछ वक्त से वहां थीं. हालांकि दीवार का एक हिस्सा गिरने और सत्य निकेतन की घटना के बाद, छात्रों ने तय किया कि वहां रहना सेफ नहीं है. खबरों के मुताबिक छात्र तकरीबन 12000 रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट और 7500 रुपये का महीने का किराया देते थे, जबकि खाने का खर्च अलग से 4,000 रुपये था.
कॉलेज ने अस्थायी व्यवस्था की
स्टूडेंट्स की तरफ से ये मुद्दा उठाने के बाद, पुलिस वहां पहुंची और उन्हें जगह खाली करने में मदद की. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने कंवेंशन हॉल और क्लासरूम में अस्थायी रहने की व्यवस्था की और गद्दे और दूसरी जरूरी चीजें मुहैया कराईं. असिस्टेंट प्रोफेसर रवींद्र सिंह ने बताया कि छात्रों ने प्रिंसिपल के साथ पीजी बिल्डिंग की हालत दिखाने वाले वीडियो शेयर किए थे. फिर कॉलेज ने इंतजाम करना शुरू किया और दूसरे कॉलेजों के छात्रों की मदद के लिए आस-पास के इंस्टीट्यूशंस से भी संपर्क किया. प्रोफेसर राम शिरोमणि मिश्रा ने कहा कि कुछ क्रैक्स को वॉल पुट्टी लगाकर छिपाया हुआ लग रहा था.
---विज्ञापन---
छात्रों ने स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग की
इस घटना ने प्राइवेट तौर पर चलाए जा रहे पीजी और छात्रों की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले किराए के फ्लैटों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. छात्रों का आरोप है कि कुछ जगहों पर शायद सही लाइसेंस, स्ट्रक्चरल ऑडिट, फायर-सेफ्टी इक्विपमेंट्स और फिटनेस सर्टिफिकेट न हों.
स्टूडेंट्स ने अच्छी तरह से इंस्पेक्शन, मैंडेटरी स्ट्रक्चरल ऑडिट, लाइसेंस वेरिफिकेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट और रहने की जगह से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे छात्रों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन की मांग की. छात्रों ने और ज्यादा कॉलेज हॉस्टल बनाने की भी मांग की. उनका तर्क है कि हॉस्टल की लिमिटेड अवेलेबिलिटी के कारण दिल्ली के बाहर से आए छात्रों को प्राइवेट पेइंग गेस्ट पर बहुत ज्यादा डिपेंड रहना पड़ता है. चिराग दिल्ली में रहने की जगह से बेघर हुए छात्रों के लिए, सेफ और किफायती ऑप्शन तलाश करना अभी सबसे बड़ी चुनौती है.
---विज्ञापन---